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16 साल में दो कोशिश, दोनों नाकाम

Tue, 28 Jan 2020 02:24 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2020 02:24 AM IST
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Two attempts in 16 years, both failed
देहरादून। लाइसेंस फीस को लेकर नगर निगम इतिहास में दो बार कोशिश हो चुकी है। दोनों ही बार निगम इसे लागू करने में नाकाम रहा। इसके पीछे कहीं न कहीं निगम अधिकारियों का अधूरा होमवर्क है। यही वजह है कि निगम को हर बार मात खानी पड़ी।
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देहरादून नगर निगम वर्ष 2003 में बना था। लेकिन, इसने लाइसेंस फीस लागू करने का पहला प्रयास वर्ष 2016 में किया था। तत्कालीन मेयर विनोद चमोली ने बोर्ड बैठक में इस पर लेकर चर्चा की। लेकिन, पार्षदों के विरोध के चलते वह बैकफुट पर आ गए। दूसरा प्रयास इस 19 जनवरी को किया गया। नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय की ओर से लाइसेंस फीस की विज्ञप्ति जारी की। इसमें 111 तरह के व्यापार को शामिल किया गया। इसके लिए व्यापारियों से आपत्तियां मांगी गई। इन पर 60 दिन के भीतर सुनवाई के बाद लाइसेंस फीस को लागू किया जाना था। लेकिन, विज्ञप्ति प्रकाशित होते ही व्यापारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। तेजी से इसने प्रचंड रूप धारण किया। जिसे देखते हुए मेयर सुनील उनियाल ने लाइसेंस फीस लागू करने के निर्णय को स्थगित कर दिया।
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वर्ष 2014 में हाउस टैक्स की दरें बढ़ाई गई थीं, जो अधिक थीं। जिसे देखते हुए लाइसेंस फीस लागू करने के निर्णय को बोर्ड के चर्चा के बाद स्थगित किया। इसमें नगर आयुक्त को अधिकार है कि वह इसे व्यवहारिक बनाएं। मौजूदा लाइसेंस फीस की दरें बहुत ज्यादा हैं, इसे संशोधित करना चाहिए। -विनोद चमोली, तत्कालीन मेयर एवं धर्मपुर विधायक
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लाइसेंस फीस की दरें प्रस्तावित थीं। मैंने शुरुआत में ही कहा था कि व्यापारियों के साथ बैठक करने के बाद ही लाइसेंस फीस को लागू किया जाएगा। व्यापारियों ने आकर अपनी बात रखी। उनकी दिक्कतें जायज लगी, जिसे देखते हुए लाइसेंस फीस को लागू नहीं किया जाएगा। - सुनील उनियाल गामा, मेयर

देश के अन्य प्रदेशों के नगर निगमों में लाइसेंस फीस व्यवस्था लागू है। नगर निगम के एक्ट में इसका प्रावधान है। यही वजह है कि इसे यहां लागू करने की योजना थी, ताकि इससे मिलने वाले राजस्व से विकास कार्य हो सके। -विनय शंकर पांडेय, नगर आयुक्त
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