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यहां आज भी मौजूद है बापू की 'छाप'

Fri, 15 Aug 2014 10:07 AM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 15 Aug 2014 10:07 AM IST
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triveni ghat rishikesh famous due to mahatma gandhi

वैसे तो ऋषिकेश में स्थित त्रिवेणीघाट को किसी पहचान की जरूरत नहीं है, लेकिन यहां पर बना गांधी स्तंभ इस घाट को देशभर के प्रसिद्घ स्थानों में शुमार करता है।

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त्रिवेणीघाट पर बने इस स्तंभ के ऊपर स्थापित शिला में महात्मा गांधी के हस्ताक्षर है। जो यहां बापू की उनकी धरोहर के रूप में मौजूद हैं। इसे देखकर बाहरी राज्य और विदेशों से आने वाले लोगों यहां से बापू के जुड़ाव का पता चलता है।
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बापू की याद दिलाता यह गांधी स्तंभ वर्तमान में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के आंदोलनों का केंद्र है। देश की आजादी से पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता प्राप्ति की मुहिम का संदेश लेकर जून 1929 को नैनीताल और अल्मोड़ा यात्रा पर आए थे।
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उस दौरान ऋषिकेश से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शांति प्रपन्न शर्मा, हरि जीवन ब्रह्मचारी, चेला चैतराम, कुंज बिहारी और जय प्रकाश शर्मा बापू से मिलने कुमाऊं गए और उन्होंने बापू से ऋषिकेश आने का आग्रह किया।

बापू से समय नहीं मिलने पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बापू के हस्ताक्षर शिलालेख पर ले आए।

बापू की याद संजोए हुए है शिलापट्ट

triveni ghat rishikesh famous due to mahatma gandhi

ऋषिकेश पहुंचने पर इन सेनानियों ने त्रिवेणीघाट पर गांधी स्तंभ का निर्माण कराकर स्तंभ के ऊपर गांधी के हस्ताक्षर वाली शिला को स्थापित कर दिया। तब से त्रिवेणीघाट पर गांधी स्तंभ में लगा यह ऐतिहासिक शिलापट्ट बापू की याद संजोए हुए है।

उपेक्षित है राष्ट्रीय धरोहर
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जयप्रकाश शर्मा के पुत्र विनय कुमार मनमीत बताते हैं बापू की राष्ट्रीय धरोहर सरकारी उपेक्षा का शिकार है।

नगर पालिका प्रशासन ने करीब पांच साल पहले सुध लेकर इसका सुंदरीकरण तो कराया, लेकिन इसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया।

जिससे गांधी स्तंभ पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो रहा है। रंगरोगन नहीं होने से स्तंभ खराब हालत में है। राजनीतिक संगठन दो अक्तूबर को श्रद्धांजली अर्पित कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। मनमीत ने राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण के लिए शहरवासियों से आगे आने की अपील की है।

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