फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Triple Talaq First Lawsuit Filed in dehradun after Husband Notice  

पति ने पत्नी को भेजा तीन तलाक का नोटिस, कोर्ट ने सुनाया ऐसा फरमान अब जिंदगीभर भुगतेगा

Wed, 17 Oct 2018 08:49 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 17 Oct 2018 08:49 AM IST
विज्ञापन
Triple Talaq First Lawsuit Filed in dehradun after Husband Notice  
triple talaq - फोटो : demo pic

पति ने निकाह के 16 साल बाद अपनी पत्नी को अचानक तकाल का नोटिस भेज दिया। अब कोर्ट ने इस पर फैसला देते हुए ऐसा फरमान सुनाया है कि अब वह पछता रहा है। महिला को तलाक का नोटिस भेजने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एमएम पांडेय की अदालत ने पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

विज्ञापन


आरोपी के खिलाफ मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम-2018 और आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। तीन तलाक प्रकरण में देहरादून का यह पहला जबकि प्रदेश का दूसरा मुकदमा होगा। इससे पहले हरिद्वार में एक महिला की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हो चुका है।  
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक डोईवाला निवासी शगुफ्ता जमाल का निकाह साल 2002 में देहरादून तेलीवाला निवासी अमीर अहमद के साथ हुआ था। महिला का कहना है कि जिस वक्त अमीर के साथ उसका रिश्ता हुआ वह एमबीबीएस तृतीय वर्ष की छात्रा थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

चरित्र पर भी सवाल उठाए थे

अमीर के परिवार ने पढ़ाई छोड़ने की बात कही तो उसने पढ़ाई छोड़ दी। महिला का आरोप है कि निकाह के कुछ समय बाद ही अमीर अहमद ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया। जैसे तैसे वह अपने जीवन का निर्वहन कर रही थी।

आरोप है कि गत 19 जुलाई को अमीर ने शगुफ्ता को नोटिस भेजकर तलाक देने की बात कही थी। अमीर ने उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए थे। इससे आहत होकर शगुफ्ता ने डोईवाला थाने में तहरीर दी, लेकिन वहां उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद मामला महिला हेल्पलाइन में चला और वहां उसकी काउंसिलिंग की गई। बावजूद इसके पति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। 

सभी ओर से निराश और परेशान होकर शगुफ्ता ने गत एक सितंबर को न्यायालय की शरण ली। इस पर न्यायालय ने डोईवाला थाने से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट देने को कहा था। थाने की ओर से 11 अक्तूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।

इस रिपोर्ट पर बहस के बाद मंगलवार को न्यायालय ने डोईवाला थाने को शगुफ्ता के पति अमीर अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। अमीर के खिलाफ मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम-2018 की धारा तीन व चार और आईपीसी की धारा 323 (मारपीट), 504 (गाली गलौच) और 498ए (दहेज के लिए प्रताड़ित करना) धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। 

तीन साल की सजा का है प्रावधान 

मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम-2018 तलाक-ए-बिद्दत यानी एक साथ तीन तलाक पर ही लागू होता है। इस अधिनियम के तहत तीन तलाक से पीड़ित महिला न्यायालय की शरण ले सकती है। इस अधिनियम के तहत एक साथ तीन तलाक मौखिक, लिखित, ईमेल, मैसेज या व्हाट्सएप किसी भी माध्यम से दिया गया हो, वह सभी तरह से अवैध है। दोषी पाए जाने पर उसे तीन साल की सजा का प्रावधान है। 

दोनों बच्चों की कस्टडी मांग सकती है शगुफ्ता 
इस अधिनियम के तहत महिला अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी भी मांग सकती है। शगुफ्ता और अमीर से दो संतान हैं। इनमें एक 2005 में जन्मा पुत्र अजान और 2010 में जन्मी पुत्री अनम है।  

मैं न्यायालय की बहुत आभारी हूं। जिस तरह से मैंने आवाज उठाई थी, उसे दबाने का भी बहुत प्रयास हुआ था। पुलिस से भी मैने उम्मीद खो दी थी। डोईवाला थाने में मेरे साथ जो व्यवहार हुआ वह बहुत ही निंदनीय है। उन्होंने मेरे कागजात ही फेंक दिए थे। न्यायालय के फैसले से अब मेरे लिए उम्मीद की किरण जागी है। 
- शगुफ्ता, तीन तलाक की पीड़ित 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed