लंबे समय से सचिवालय में जमे 226 अफसरों के तबादले, मची खलबली
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सचिवालय स्तर पर तैनात अफसरों की बहुप्रतीक्षित तबादला सूची मंगलवार को जारी कर दी गई। इसमें अपर सचिव, उपसचिव, अनुसचिवों के साथ समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी, अनुभाग अधिकारियों के 226 नाम शामिल हैं।
अरसे से एक ही पद पर बैठे समीक्षा और सहायक समीक्षा स्तर के अधिकारियों के तबादलों से सचिवालय में खलबली मची रही। इनके लिए क्राइटेरिया तीन साल का रखा गया था। सचिवालय सूत्रों की मानें तो इस सूची में तमाम ऐसे नाम भी हैं, जो अपने रसूख और राजनीतिक कनेक्शन के बदौलत पांच साल से भी ज्यादा वक्त से एक ही जगह जमे हुए थे।
सचिवालय प्रशासन द्वारा जारी सूची में संयुक्त सचिव रमेश कुमार को गृह के साथ नियोजन और उद्यान, राजेंद्र सिंह को कृषि और आवास विभाग, अतर सिंह को सचिवालय प्रशासन, गरिमा रौंकली को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के साथ पर्यटन और औद्योगिक विकास विभाग, मायावती ढकरियाल को पशुपालन एवं दुग्ध विकास के साथ समाज कल्याण विभाग, मदन मोहन सेमवाल को आयुष एवं आयुष शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा विभाग, राजेंद्र सिंह तोमर को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति के अलावा वन एवं पर्यावरण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में किए गए।
इनके हुए तबादले
लक्ष्मण सिंह को महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास और राज्य संपत्ति विभाग, ओमकार सिंह को गोपन, सिंचाई के अलावा लघु सिंचाई विभाग, वीरेंद्र पाल सिंह को पंचायती राज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और वित्त विभाग, कवींद्र सिंह को ऊर्जा विभाग के साथ सामान्य प्रशासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग और महावीर सिंह को सचिवालय प्रशासन व पेयजल विभाग का जिम्मा सौंपा गया है।
इसी क्रम में 13 संयुक्त सचिव, 17 उपसचिवों और 33 अनुसचिवों के विभागों में भी फेरबदल किया गया है। गौरतलब है कि सचिवालय में समीक्षा अधिकारियों के साथ ही सहायक समीक्षा अधिकारी और अनुभाग अधिकारियों के तबादलों की प्रतीक्षा लंबे समय से की जा रही थी। सचिवालय प्रशासन के स्तर पर इसकी कवायद भी आरंभ हो गई थी।
मंगलवार शाम 97 समीक्षा अधिकारी, 16 सहायक समीक्षा अधिकारी और 50 अनुभाग अधिकारियों के तबादले की सूची जारी कर दी गई। लंबे समय बाद हुए इस बड़े फेरबदल पर तमाम चर्चाएं होती रहीं। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस आदेश का पालन करवाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सूची में स्पष्ट रूप से ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को कहा गया है, जो तत्काल प्रभाव से अपनी नवीन तैनाती पर ज्वाइनिंग नहीं देते हैं। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि कार्रवाई के पूर्व कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया जाएगा।