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पाक से लड़ी जंग, देश ने नहीं माना सैनिक

Sat, 26 Jul 2014 01:43 AM IST
अमर उजाला, रुड़की
अमर उजाला, रुड़की Updated Sat, 26 Jul 2014 01:43 AM IST
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tragic story of army man rajkumar
सन 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान घायल हुए राजकुमार 42 साल से न्याय के लिए भटक रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें पूर्व सैनिक का सम्मान नहीं मिल पाया है। इसके लिए वे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्रालय को करीब 500 पत्र लिख चुके हैं।
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कांट्रैक्ट पर ज्वाइन की थी बीआरओ
दिल्ली-हरिद्वार हाईवे स्थित विष्णुविहार कालोनी निवासी राजकुमार अग्रवाल बताते हैं कि उन्होंने 20 अगस्त 1969 को तीन साल के कांट्रैक्ट पर ग्रीफ (बीआरओ) ज्वाइन की थी।
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उनकी नियुक्ति वेस्टर्न बेस वर्कशॉप आर्मी ग्रीफ पठानकोट में थी। इसी दौरान सन 1971 में भारत-पाक युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध में उन्होंने एक सैनिक की तरह काम किया। युद्ध के दौरान वह घायल भी हो गए थे।
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दे चुके हैं 500 प्रार्थना पत्र
इसके बाद वह लंबे समय तक बीमार रहे। 1972 में उनका कांट्रेक्ट पूरा हुआ तो उन्हें हटा दिया गया। इसके बाद उन्हें एक पूर्व सैनिक जैसा सम्मान नहीं मिला।

इस सम्मान को पाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं रक्षा मंत्रालय को करीब 500 प्रार्थना-पत्र भेजे हैं।

न्याय की आस
फिलहाल वह अपने बेटे के साथ बीटीगंज स्थित कपड़े की एक छोटी सी दुकान चलाकर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि एक दिन उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।
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