टॉपर्स ने मेधावियों को दिए सफलता के मंत्र, बताया ऐसे बन सकते हैं IAS
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अमर उजाला और बलूनी क्लासेज की ओर से हरिद्वार बाईपास स्थित होटल सॉलिटियर में टॉपर्स टूर-2017 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पीसीएस, आईआईटी और एमबीबीएस के टॉपर्स ने छात्र-छात्राओं को सफलता के टिप्स दिए। बलूनी क्लासेज की ओर से 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के मेधावियों को सम्मानित भी किया गया।
मंगलवार को मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, मुख्यमंत्री के सलाहकार व बलूनी ग्रुप ऑफ एजुकेशन के चेयरमैन डा. नवीन बलूनी, बलूनी क्लासेज के एमडी विपिन बलूनी और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने छात्र-छात्राओं से सफलता के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।
शॉर्ट कट से कई बार सफलता मिल सकती है, लेकिन यह स्थाई नहीं होती। जितनी तेजी से आदमी ऊपर चढ़ता है, उतनी ही तेजी से नीचे भी गिरता है। उन्होंने 10वीं, 11वीं, और 12वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावियों को बलूनी क्लासेस की ओर से विशेष मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में वक्ता के रूप में पहुंचे पीसीएस परीक्षा के टॉपर व असिस्टेंट कमिश्नर पद पर कार्यरत एसएस पाठक, आईआईटी टॉपर व हाइक मैसेंजर में कार्यरत अमित शेखर और एमबीबीएस टॉपर व गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा रही विनीता नेगी ने छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने न केवल छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित किया बल्कि उनके सवालों के जवाब भी दिए। अपर सचिव श्रीधर बाबू अदांकी ने भी छात्रों को सफलता के लिए आगे बढ़ने को प्रेरित किया।
डा. नवीन बलूनी ने कहा कि कामयाबी का मतलब केवल अच्छी नौकरी पाना नहीं है। लेकिन आप समाज और देश के लिए अच्छा काम कर लोगों को प्रेरित कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप कामयाब हैं। इस अवसर पर बलूनी क्लासेज के एमडी विपिन बलूनी, सॉलिटियर होटल के चेयरमैन ऋषि बंसल, बलूनी पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य प्रकाश नौटियाल, कविलाश नेगी, डा. एसएस राणा समेत अन्य मौजूद रहे।
औसत छात्र भी बन सकते हैं आईएएस-आईपीएस
पीसीएस परीक्षा के टॉपर और वर्तमान में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत एसएस पाठक ने सिविल सर्विसेज की तैयारियों को लेकर छात्रों को टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि सिविल सर्विसेज को सबसे मुश्किल माना जाता है लेकिन फोकस रहकर लगातार मेहनत करने से सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि औसत छात्र भी सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सिविल सर्विसेज को हम मुश्किल इसलिए मानते हैं क्योंकि हमारे आस-पास से बहुत कम लोग निकलते हैं। जबकि जब दो-चार लोग सिविल सर्विसेज पास करते हैं तो हमारा डर कम होने लगता है। यही माहौल का असर है। जिस परिवार में दो लोग डॉक्टर या इंजीनियर होते हैं, वहां बच्चों को वह विषय आसान लगता है।
उन्होंने कहा कि अगर आपकी दो विषय में अच्छी कमांड है तो आप प्रोफेसर या साइंटिस्ट बन सकते हैं। एक विषय में अच्छी पकड़ है तो डॉक्टर या इंजीनियर हो सकते हैं। लेकिन किसी विषय पर कमांड नहीं है तो आप सिविल सर्विसेज पास कर सकते हैं। ज्यादातर पढ़ाई में औसत रहने वाले लेकिन हर विषय पर अपनी कमांड रखने वाले ही सिविल सर्विसेज क्वालिफाई करते हैं। नेट क्वालिफाइड एसएस पाठक ने 32 वर्ष की उम्र में सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की।
इंजीनियर बनना है तो गणित का डर निकालें
आईआईटी टॉपर व हाइक मैसेंजर में कार्यरत अमित शेखर ने इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं से गणित का डर अपने मन से निकालने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब आप गणित का डर अपने मन से हटा लेंगे तो इंजीनियरिंग खासी आसान हो जाएगी। याद रखिये गणित भी अन्य विषयों की तरह है, समझ जाएंगे तो आसान लगने लगेगी।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर छात्र-छात्राओं को गणित सबसे ज्यादा मुश्किल लगती है। पढ़ाई की शुरूआत में जब बच्चे गणित के सवालों में उलझते हैं तो वह उनका हल निकालने के बजाय बचने की कोशिश करते हैं। वह अपेक्षाकृत आसान सवाल या विषयों पर ध्यान लगाते हैं। इससे गणित के प्रति उनके मन में डर लगातार बढ़ता जाता है।
आगे जाकर गणित के साथ ही उससे जुड़े विषय जैसे फिजिक्स को लेकर भी घबराहट बढ़ने लगती है। जबकि इनमें से कई छात्र ऐसे होते हैं, जो इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कमियों और मुश्किलों को लेकर बहाने बनाने के बजाय हमें अवसर ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए। जो विपरीत हालातों में खुद को ढाल लेते हैं, वह हमेशा आगे बढ़ते हैं।
10वीं के बाद शुरू कर दें मेडिकल की तैयारी
मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए छात्रों को 10वीं के बाद से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। डॉक्टर बनने के लिए जरूरी है कि एक विषय पर फोकस कर तैयारी की जाए लेकिन अन्य विषयों की पढ़ाई भी आवश्यक है। मेधावियों को कामयाबी के गुर सिखाते हुए एमबीबीएस टॉपर विनीता नेगी ने कहा कि निरंतर मेहनत ही सफलता तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है।
मेरठ मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद गरीबों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा रही विनीता नेगी ने कहा कि हमेशा मुश्किल हालात और परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए। जैसा हम सोचते या चाहते हैं, हमेशा वैसा मिले, ऐसा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना दर्द सहे और मेहनत किए सफलता नहीं मिलती।
उन्होंने कहा कि सफलता पाने वाले चाहे किसी भी क्षेत्र, आयु, वर्ग के हों लेकिन उनमें एक बात हमेशा कॉमन होती है कि वह संघर्ष की आग में तपकर निकले होते हैं। मेडिकल के क्षेत्र में कंपटिशन बहुत ज्यादा है। लेकिन आपको केवल अपनी एक सीट पर फोकस करना चाहिए। यह सोचकर तैयारी करें कि एक सीट भी खाली होगी तो मेरा ही सलेक्शन होगा।
केवल मेडल और रिजल्ट से नहीं होते कामयाब
जिन छात्रों को मेडल और प्रशस्ति पत्र नहीं मिलते वह भी जीवन में आगे चलकर सफलता के शिखर छू सकते हैं। बस सही वक्त पर सही फैसला लेने और लक्ष्य तय कर उसके लिए मेहनत करने की जरुरत होती है। कार्यक्रम में उत्तरकाशी जिलाधिकारी के रूप में बेहद लोकप्रिय रहे अपर सचिव श्रीधर बाबू अदांकी और बलूनी ग्रुप ऑफ एजुकेशन के चेयरमैन व मुख्यमंत्री के सलाहकार डा. नवीन बलूनी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि औसत छात्र कभी-कभी वह कर देते हैं, जो टॉपर्स भी नहीं कर पाते।
अपर सचिव श्रीधर बाबू अदांकी ने बताया कि स्कूल समय में औसत स्टूडेंट थे। बाद में उन्होंने बैंक क्लर्क की जॉब की। मेहनत की और पीओ, आरबीआई होते हुए सिविल सर्विसेज तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों को आज मेडल नहीं मिला, ऐसा नहीं कि वह बेकार हैं। हो सकता है उनमें से कोई कल बहुत अच्छा क्रिकेटर बनेगा। कोई संगीतकार और कोई पर्वतारोही। कुछ शिक्षा के क्षेत्र में भी सफलता हासिल कर सकते हैं। बस अपना एटीट्यूड हमेशा पॉजिटिव रखें। जो भी करें उसे दिल लगाकर करें। अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट और इंटीग्रिटी हमेशा बनाकर रखें।
बलूनी ग्रुप ऑफ एजुकेशन के चेयरमैन डा. नवीन बलूनी ने बताया कि उनका बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता। 1992 में सीपीएमटी क्वालिफाई करने के बाद उन्होंने एमबीबीएस किया। इसके बाद डबल एमडी भी किया। लेकिन कभी नौकरी करने की नहीं सोची। आगरा में बलूनी क्लासेज की स्थापना की। उसके बाद मेहनत और संघर्ष के दम पर उन्होंने देहरादून, रुड़की, हल्द्वानी, कोटद्वार समेत कई जगहों पर इसकी ब्रांच खोली। पिछले 15 वर्षों से अधिक समय में बलूनी क्लासेज उत्तर भारत का प्रमुख कोचिंग संस्थान बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सही फैसला लेने के कारण संभव हो पाया। अगर शुरूआत में वह नौकरी करने की सोचते तो शायद आज इतना बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर पाते।
टॉपर्स ने दिए गुरुमंत्र
- काबिल बनो, कामयाबी खुद आएगी
- मल्टी टैलेंटेंड, मल्टी टास्किंग बनो
- बिना मेहनत कुछ हासिल नहीं होता
- सफलता के लिए कष्ठ उठाने होंगे
- असफलता से मत डरो, दोगुनी मेहनत करो
- आलस्य सफलता का सबसे बड़ा दुश्मन है
- कल के भरोसे छोड़ने की आदत बदलें
- विपरीत परिस्थितियों में अवसर खोजें