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पहाड़ों में टमाटर और सब्जियों के दाम में लगी 'आग'
ब्यूरो / अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Sat, 29 Jul 2017 03:26 PM IST
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सब्जियों के दाम आसमान छूने से यह गरीब की थाली से गायब होने लगी है। यह स्थिति सब्जी उत्पादन के लिए स्थानीय काश्तकारों को सरकारी सपोर्ट न मिलने से उत्पन्न हुई है। उत्तरकाशी नगर में ही मैदानी मंडियों के रोजना चार ट्रक सब्जी आ रही है।
जिले में आलू एवं शाक भाजी विकास अधिकारी तैनात है। कुछ काश्तकार अपने प्रयासो से जिले में टमाटर, शिमलामिर्च, बैंगन, बंद गोभी, फूलगोभी, कदू ककड़ी उगा रहे है। विभागीय योजना कुछ काश्तकारों को सब्जी बीज तथा कुछ पौध देने तक सीमित है। जिले में सब्जी की खपत की पूर्ति और उसे मैदानी मंडियों तक भेजने के लिए काश्तकारों को सक्षम बनाकर तैयार करने का कोई कार्यक्रम नहीं है।
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अनुकूल जलवायु और 80 प्रतिशत राज्य सहायता वाली पॉली हाउस की योजना यहां सब्जी उत्पादन को बढावा देने के लिए पर्याप्त है। यमुना घाटी में जरूर कुछ संस्थाओं तथा प्रगतिशील किसानों के कारण टमारट आदि सब्जी का उत्पादन हो रहा है। किंतु इस बार मौसम की मार से फसल बर्बाद हो गई।
उत्तरकाशी सब्जी बाजार में पहाड़ी ककडी 60, फूल गोभी 80 रुपए, टमाटर 60, फ्रेंचबीन 60 रुपए जबकि भिंडी, लौंकी, बैंगन, कद्दू 40 रुपए किलो बिक रही है। बार्सू गांव के किसान जगमोहन सिंह जरूर 40 रुपए किलो पर गांव से ही रोजना दो कुंतल टमाटर बाजार भेज रहे हैं।
जिला आलू एवं शाक भाजी विकास अधिकारी ब्रजराज सिंह कहते है कि विभाग के द्वारी तथा जरमोला फार्म में सब्जी पौध तैयार कर काश्तकारों को बांटी गई तथा उन्नत किस्म की बीज भी दिए गए। पॉलीहाउस की भी 80 प्रतिशत राज्य सहायता वाली योजना है, किंतु अभी ज्यादा काश्तकारों के इस नकदी फसल में रुचि न लेने से मैदानी मंडियों पर ही स्थानीय उपभोक्ता निर्भर है।
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जिले में आलू एवं शाक भाजी विकास अधिकारी तैनात है। कुछ काश्तकार अपने प्रयासो से जिले में टमाटर, शिमलामिर्च, बैंगन, बंद गोभी, फूलगोभी, कदू ककड़ी उगा रहे है। विभागीय योजना कुछ काश्तकारों को सब्जी बीज तथा कुछ पौध देने तक सीमित है। जिले में सब्जी की खपत की पूर्ति और उसे मैदानी मंडियों तक भेजने के लिए काश्तकारों को सक्षम बनाकर तैयार करने का कोई कार्यक्रम नहीं है।
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अनुकूल जलवायु और 80 प्रतिशत राज्य सहायता वाली पॉली हाउस की योजना यहां सब्जी उत्पादन को बढावा देने के लिए पर्याप्त है। यमुना घाटी में जरूर कुछ संस्थाओं तथा प्रगतिशील किसानों के कारण टमारट आदि सब्जी का उत्पादन हो रहा है। किंतु इस बार मौसम की मार से फसल बर्बाद हो गई।
उत्तरकाशी सब्जी बाजार में पहाड़ी ककडी 60, फूल गोभी 80 रुपए, टमाटर 60, फ्रेंचबीन 60 रुपए जबकि भिंडी, लौंकी, बैंगन, कद्दू 40 रुपए किलो बिक रही है। बार्सू गांव के किसान जगमोहन सिंह जरूर 40 रुपए किलो पर गांव से ही रोजना दो कुंतल टमाटर बाजार भेज रहे हैं।
जिला आलू एवं शाक भाजी विकास अधिकारी ब्रजराज सिंह कहते है कि विभाग के द्वारी तथा जरमोला फार्म में सब्जी पौध तैयार कर काश्तकारों को बांटी गई तथा उन्नत किस्म की बीज भी दिए गए। पॉलीहाउस की भी 80 प्रतिशत राज्य सहायता वाली योजना है, किंतु अभी ज्यादा काश्तकारों के इस नकदी फसल में रुचि न लेने से मैदानी मंडियों पर ही स्थानीय उपभोक्ता निर्भर है।