{"_id":"16bf0edf77347cfc8f171f7b841dc89c","slug":"tigress-dead-body-found-in-river","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंगल में मिला बाघिन का सड़ा गला शव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंगल में मिला बाघिन का सड़ा गला शव
अमर उजाला, कालागढ़/कोटद्वार
Updated Mon, 30 Jun 2014 12:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ डिवीजन के सोना नदी रेंज में एक बाघिन का सड़ा गला शव मिला है।
मौत के कारणों का पता नहीं
बाघिन के शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप है। शव का पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर के अनुसार बाघिन का शव इतना सड़ा है कि मौत के कारणों का पता नहीं लग पाया है।
उधर वन विभाग के अधिकारियों ने बाघिन की मौत को स्वाभाविक बताते हुए अंग सुरक्षित होने का दावा किया है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ डिवीजन के सोनानदी रेंज के धौलखंड ब्लाक के कक्ष संख्या 13 में गश्ती दलों को शनिवार की शाम बाघिन का सड़ा गला शव मिला।
रेंजर एचसी भट्ट के अनुसार जंगल में गश्त के दौरान वन दारोगा मोहन सिंह के दल ने बाघिन के शव मिलने की सूचना दी। मौके पर कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डा. साकेत बड़ोला, डीएफओ कोका रोजा भी पहुंचे।
बाघिन की उम्र करीब 5-6 वर्ष
प्रथम दृष्टया बाघिन के अंग सुरक्षित मिले। बाघिन की उम्र करीब 5-6 वर्ष बताई जा रही है। उधर बाघिन के शव का पोस्टमार्टम डा. भारत सिंह व कालागढ़ के पशु चिकित्साधिकारी डा. वीपी सिंह के पैनल ने किया।
विज्ञापन
डा. वीपी सिंह का कहना है कि बाघिन का शव काफी दिन पुराना लग रहा है। उसके सड़ गल जाने से मौत के कारणो का पता लगाना संभव नही है। उसके शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं था।
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी आफ इंडिया के उत्तराखंड प्रभारी राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि इस इलाके में बाबरिया गिरोह सक्रिय रह चुका है।
भीमा जैसे शातिर को पड़ोस के लैंसडौन डिवीजन के जंगल में बाघों के शिकार के लिए कड़के लगाने के जुर्म में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
उसके बाद यहां बाघिन का शव मिलना और मौत के कारणों का पता न लगने से मामला संदेह के घेरे में आ जाता है। इस मामले की जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
मौत के कारणों का पता नहीं
बाघिन के शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप है। शव का पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर के अनुसार बाघिन का शव इतना सड़ा है कि मौत के कारणों का पता नहीं लग पाया है।
उधर वन विभाग के अधिकारियों ने बाघिन की मौत को स्वाभाविक बताते हुए अंग सुरक्षित होने का दावा किया है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ डिवीजन के सोनानदी रेंज के धौलखंड ब्लाक के कक्ष संख्या 13 में गश्ती दलों को शनिवार की शाम बाघिन का सड़ा गला शव मिला।
रेंजर एचसी भट्ट के अनुसार जंगल में गश्त के दौरान वन दारोगा मोहन सिंह के दल ने बाघिन के शव मिलने की सूचना दी। मौके पर कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डा. साकेत बड़ोला, डीएफओ कोका रोजा भी पहुंचे।
विज्ञापन
बाघिन की उम्र करीब 5-6 वर्ष
प्रथम दृष्टया बाघिन के अंग सुरक्षित मिले। बाघिन की उम्र करीब 5-6 वर्ष बताई जा रही है। उधर बाघिन के शव का पोस्टमार्टम डा. भारत सिंह व कालागढ़ के पशु चिकित्साधिकारी डा. वीपी सिंह के पैनल ने किया।
विज्ञापन
डा. वीपी सिंह का कहना है कि बाघिन का शव काफी दिन पुराना लग रहा है। उसके सड़ गल जाने से मौत के कारणो का पता लगाना संभव नही है। उसके शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं था।
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी आफ इंडिया के उत्तराखंड प्रभारी राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि इस इलाके में बाबरिया गिरोह सक्रिय रह चुका है।
भीमा जैसे शातिर को पड़ोस के लैंसडौन डिवीजन के जंगल में बाघों के शिकार के लिए कड़के लगाने के जुर्म में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
उसके बाद यहां बाघिन का शव मिलना और मौत के कारणों का पता न लगने से मामला संदेह के घेरे में आ जाता है। इस मामले की जांच होनी चाहिए।