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उत्तराखंड में यहां पहली बार मिले बाघों के निशान

Wed, 19 Feb 2014 11:36 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 19 Feb 2014 11:36 AM IST
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tiger mark found in dehradun and haridwar

इस समय देश के 17 राज्यों में बाघ गणना चल रही है। उत्तराखंड में भी पहला चरण पूरा होने को है।

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उत्तराखंड तीसरे स्थान पर
शुरुआती रुझान इस बार भी बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी की ओर इशारा कर रहे हैं। चार साल पहले हुई गणना में बाघों की संख्या के लिहाज से उत्तराखंड देश में तीसरे स्थान पर रहा था।

बाघ गणना के लिए प्रदेश में इस साल चार नई जगहों को शामिल किया गया है। इनमें देहरादून, हरिद्वार, नरेंद्रनगर और कालसी प्रमुख हैं। वन विभाग के मुताबिक हरिद्वार और देहरादून की कुछ रेंजों में पहली बार बाघों के निशान पाए गए हैं।
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हालांकि इनकी संख्या कितनी है, इसका पता गणना का नतीजा आने के बाद ही चल पाएगा। वन विभाग के मुताबिक राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े इलाकों में बाघ आसानी से विचरण कर सकते हैं। इसीलिए इन इलाकों में गणना की जा रही है।
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2010 में प्रदेश में थे 227 बाघ
वर्ष 2006 में हुई गणना में पूरे देश में 1411 और वर्ष 2010 में हुई गणना में बाघों की संख्या 1706 पाई गई थी। वर्ष 2010 में 300 बाघों के साथ कर्नाटक प्रथम, 257 बाघों के साथ मध्य प्रदेश दूसरे और 227 बाघों के साथ उत्तराखंड तीसरे स्थान पर था। शुरुआती संकेतों के आधार पर इस बार आंकड़ा 230 से 245 के बीच रहने का अनुमान है।

गणना एक लंबी प्रक्रिया है। करीब एक साल बाद तय हो पाएगा कि बाघों की असल संख्या क्या है। लेकिन शुरुआती संकेत सुखद नतीजे की ओर इशारा कर रहे हैं।
- धनंजय मोहन, मुख्य वन संरक्षक व बाघ गणना राज्य समन्वयक

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