इन रास्तों से कार्बेट में 'घुसपैठ' कर रहे हैं बाघ
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उत्तराखंड में बाघों की आबादी बढ़ने के साथ उनके आवागमन के नए रास्ते (कॉरिडोर) भी विकसित हुए हैं। ‘स्टेटस आफ टाइगर्स इन इंडिया 2014’ रिपोर्ट में साफ हुआ है कि राजाजी नेशनल पार्क (हरिद्वार) के बाघ कार्बेट नेशनल पार्क (नैनीताल) तक का सफर बिजनौर और पौड़ी (कोटद्वार) के जंगलों से होकर पूरा करने लगे हैं।
बिजनौर का रास्ता उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित सोना नदी वन्यजीव विहार से निकलता है, जबकि पौड़ी जिले में शिवालिक पर्वत श्रृंखला में स्थित लैंसडौन वन प्रभाग राजाजी को कार्बेट से जोड़ने वाला दूसरा रास्ता है। दोनों रास्तों पर बाघों की आवाजाही दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में साफ किया गया है कि बाघों ने नए रास्ते तो बनाए हैं, लेकिन इन रास्तों पर लगातार बढ़ते आबादी के दबाव के चलते बाघों की सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है। राजाजी पार्क की मोतीचूर रेंज स्थित खांड गांव और आसपास के क्षेत्र को दोबारा प्राकृतिक रूप में लाने की जरूरत जताई गई है।
रायवाला से ऋषिकेश के बीच गंगा में अतिक्रमण को बड़ी परेशानी बताया गया है। सोना नदी वन्यजीव विहार और लैंसडौन वन प्रभाग में पर्यटन गतिविधियों से वन्यजीवों को नुकसान की आशंका जताई गई है। ऐसे में इन सभी स्थानों पर सुरक्षा की खास जरूरत विशेषज्ञों ने जताई है।
इसलिए बढ़ी बाघों की संख्या
वर्ष 2010 के मुकाबले वर्ष 2014 की गणना में बाघों की संख्या बढ़ने की एक वजह यह भी है कि इस दफा दो अतिरिक्त राज्यों और एक नए वन क्षेत्र में बाघों की गिनती की गई।
वर्ष 2010 में अरुणाचल प्रदेश में गणना नहीं हो सकी थी, इस बार यहां 28 बाघ मिले। गोवा में पहली बार गणना हुई, जहां पांच बाघ पाए गए। उत्तर पश्चिम बंगाल क्षेत्र को अलग से गणना में शामिल किया गया, वहां तीन बाघ मिले।
इन तीनों क्षेत्रों में बाघों की कुल संख्या 36 रही। वर्ष 2010 में 1706 बाघ पाए गए थे, जबकि इस बार कुल संख्या 520 अधिक 2226 रही। करीब एक साल चली गणना में 18 बाघ बहुल राज्यों के कुल 3,78,118 वर्ग किलोमीटर जंगलों का सर्वेक्षण किया गया।
राज्यपाल ने दी बधाई
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में बृहस्पतिवार को एक संगोष्ठी के समापन पर पहुंचे उत्तराखंड के राज्यपाल केके पॉल ने स्टेटस आफ टाइगर्स रिपोर्ट 2014 में प्रदेश में बढ़ी बाघ की संख्या बढ़ने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी अधिकारियों इस उपलब्धि के लिए बधाई के पात्र हैं।