{"_id":"fd23d01d7f9bc47c57376e72a50df43f","slug":"this-food-gives-long-life","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़ का यह स्वाद दिलाएगा लंबी उम्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़ का यह स्वाद दिलाएगा लंबी उम्र
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 31 Jan 2014 12:50 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर आप भी सौ साल जीने के तलबगार हैं तो फौज की नाक रहे लेफ्टिनेंट कर्नल इंद्र सिंह रावत की राय आपके लिए फायदेमंद हो सकती है।
विज्ञापन
लहजा अभी भी युवाओं जैसा बिंदास
उम्र का शतक पूरे करने वाले इंद्र सिंह का लहजा अभी भी युवाओं जैसा बिंदास है। वह खुद मानते हैं कि ज्योतिषियों ने उनकी उम्र 108 बताई है। अगर यही दम-खम रहा तो हो सकता है यह सच साबित हो।
पढ़ें, राहुल की चली तो इंदिरा बनेंगी सीएम
विज्ञापन
उनकी मानें तो अपना पहाड़ी खाना खाएं, निवाले को 60 बार चबाएं तो खाना आसानी से पचेगा। इसके साथ योग, प्राणायाम के जरिए उम्र को धोखा देना संभव है।
पढ़ें, गजब, जूता बना मोबाइल चार्जर, बल्ब भी जला
विज्ञापन
गढ़वाल कुमाऊं के बॉर्डर पर पड़ने वाले राठ के रहने वाले वाले कीर्ति चक्र विजेता इंद्र सिंह रावत का मानना है कि कोदा, झंगोरा बेहद पौष्टिक होता है। इससे शरीर के लिए आवश्यक तत्वों की पूर्ति होती हे। सबसे जरूरी बात खाएं जरूरत भर।
पढ़ें, सीएम बहुगुणा को मिलता है विधायक से कम वेतन
उतना ही, जितना पचा सकें। साथ ही सोने-उठने का समय भी नियत कर लें और फिर इसका कड़ाई से पालन करें। रावत ही नहीं, उनकी बहनें भी उन्हीं की तरह उम्र को पीछे छोड़ रही हैं।
पढ़ें, विदाई के बाद ये होगा बहुगुणा का नया ठिकाना
एक बहन बिंद्रा देवी 96 साल की हैं, जबकि दूसरी संवाली देवी 90 साल की। उनका सेहत मूल-मंत्र भी वही है, जो लेफ्टिनेंट कर्नल इंद्र सिंह रावत का।
यूं छोड़ा धूम्रपान
कीर्ति चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल इंद्र सिंह रावत के अनुसार 19 साल की उम्र में उन्होंने फौज में नौकरी शुरू की थी। उस वक्त वह धूम्रपान के आदी थे। वह इसे छोड़ना चाह रहे थे, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था।
पढ़ें, उत्तराखंड को 14 साल में मिले 7 मुख्यमंत्री
बकौल रावत इस बीच एक दौड़ हुई, जिसमें एक सिख धावक उनसे आगे निकल गया। उन्होंने धावक से इसका राज पूछा तो उसने बताया कि उसने कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाया। बस उसी दिन से मैंने भी इसे हाथ नहीं लगाया।