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अक्षय कुमार की फिल्म ने छोड़ी ऐसी छाप कि नौकरी छोड़कर ‘पैडवुमैन’ बन गईं ये बेटियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 17 Jul 2018 08:58 AM IST
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देहरादून की बेटियां सस्ते सेनेटरी नैपकिन बनाकर राजधानी की ‘पैडवुमैन’ बन गई हैं
- फोटो : amar ujala
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नौकरी छोड़कर देहरादून की बेटियां सस्ते सेनेटरी नैपकिन बनाकर राजधानी की ‘पैडवुमैन’ बन गई हैं। इन बेटियों ने अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन से प्रभावित होकर यह शुरुआत की है। बेटियों ने यह मुहिम महिलाओं को यौन संक्रमण से जुड़ी खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए शुरू की है। इसके अलावा इस काम के जरिये 50 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से भी जोड़ा है।
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मूलरूप से उत्तरकाशी निवासी डॉ. पुष्पा नेगी, पेशे से डॉक्टर (बीएएमएस) हैं। उन्होंने सिनर्जी, लाइफलाइन जैसे कई अस्पतालों में काम किया है। इसी प्रकार श्रीनगर की बेटी निवेदिता चमोली, पेशे से फार्मेसिस्ट हैं और एक संस्था से जुड़ी रहीं। इन दोनों की मुलाकात एक संस्था के कार्यक्रम में हुई थी। उन दिनों अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन रिलीज हुई थी। इसी फिल्म से प्रेरणा लेकर डॉ. पुष्पा नेगी और निवेदिता चमोली ने भी ‘पैडवुमैन’ बनने की राह चुनी।
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इसके लिए दोनों ने माही फाउंडेशन के नाम से संस्था बनाई और सस्ते सेनेटरी नैपकिन बनाने की शुरुआत की। इसके अलावा घर-घर जाकर महिलाओं को माहवारी के दौरान कपड़े से होने वाले संक्रमण के प्रति जागरूक करने का काम भी शुरू किया। पुष्पा और निवेदिता ने यह सारा काम अपने बलबूते शुरू किया। दोनों कॉलोनियों में शिविर लगाकर महिलाओं को जागरूक करतीं और सस्ते सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध करातीं, लेकिन बाद में इलाहाबाद की बेटी अल्का शुक्ला का साथ मिला तो इस मुहिम को बल मिला।
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25 हजार से ज्यादा महिलाएं उनके सस्ते सेनेटरी नैपकिन इस्तेमाल कर रही हैं
sanitary napkin
फिलहाल तीनों का दावा है कि इस मुहिम के तहत दून और आसपास के क्षेत्रों की 25 हजार से ज्यादा महिलाएं उनके सस्ते सेनेटरी नैपकिन इस्तेमाल कर रही हैं। इसके अलावा बाजार में उपलब्ध नैपकिन के मुकाबले माही फाउंडेशन के नैपकिन ज्यादा सुरक्षित और सस्ते हैं। माही फाउंडेशन द्वारा बनाया गया पांच नैपकिन का पैकेट महज 22 रुपये का है।
कागज की पैकिंग से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
डॉ. पुष्पा नेगी ने बताया कि केंद्र सरकार लगातार पॉलिथीन बंद करने की दिशा में प्रयास कर रही है। इसी को ध्यान रखते हुए सेनेटरी नैपकिन कागज की पैकिंग में उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
50 से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं
निवेदिता चमोली ने बताया कि माही फाउंडेशन तेजी से महिलाओं के रोजगार का जरिया भी बन रहा है। अभी तक फाउंडेशन से करीब 50 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। महिलाओं को प्रति नैपकिन पांच रुपये की दर से भुगतान किया जाता है।
माही फाउंडेशन की टीम
डॉ. पुष्पा नेगी, निवेदिता चमोली, अल्का शुक्ला, संगीता नवानी, विनीता चौहान, नीलम, गीता राणा, पुष्पा रावत, कमला पांडेय, रेखा रावत, दीपा, बबीता, शीला, राजकुमारी लखेड़ा, दीना, रीना मंगलाई, अनीता अग्रवाल।
कागज की पैकिंग से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
डॉ. पुष्पा नेगी ने बताया कि केंद्र सरकार लगातार पॉलिथीन बंद करने की दिशा में प्रयास कर रही है। इसी को ध्यान रखते हुए सेनेटरी नैपकिन कागज की पैकिंग में उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
50 से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं
निवेदिता चमोली ने बताया कि माही फाउंडेशन तेजी से महिलाओं के रोजगार का जरिया भी बन रहा है। अभी तक फाउंडेशन से करीब 50 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। महिलाओं को प्रति नैपकिन पांच रुपये की दर से भुगतान किया जाता है।
माही फाउंडेशन की टीम
डॉ. पुष्पा नेगी, निवेदिता चमोली, अल्का शुक्ला, संगीता नवानी, विनीता चौहान, नीलम, गीता राणा, पुष्पा रावत, कमला पांडेय, रेखा रावत, दीपा, बबीता, शीला, राजकुमारी लखेड़ा, दीना, रीना मंगलाई, अनीता अग्रवाल।