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देहराूदून: पिंक शौचालय है नहीं, महिलाओं को सार्वजनिक का प्रयोग करने में संकोच...पड़ताल में सामने आई ये बातें

Sat, 30 Sep 2023 03:27 PM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sat, 30 Sep 2023 03:27 PM IST
सार

पिंक शौचालय को लेकर पड़ताल की गई। सबसे पहले मुख्य बाजार में जल संस्थान कार्यालय के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय को देखा गया। यहां सार्वजनिक शौचालय में भीतर महिलाओं के तीन शौचालय थे, लेकिन कर्मचारियों से पता चला महिलाएं कभी कभार ही शौचालय का प्रयोग करती है।

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There is no pink toilet, women hesitate to use public
अमर उजाला से बातचीत करती महिला। - फोटो : amar ujala

विस्तार

शहर की कमान एक महिला जनप्रतिनिधि के हाथ में है, लेकिन हैरानी की बात है कि शहर में महिलाओं के लिए अलग से एक भी पिंक शौचालय नहीं है। मुख्य बाजार में करीब दो किलोमीटर की दूरी पर दो सार्वजनिक शौचालय हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र की महिलाएं इन सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करने में संकोच करती है।

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सार्वजनिक शौचालयों में वैसे तो 24 घंटे सुविधा का बोर्ड लगा है, पर सभी रात को नौ बजे ही बंद हो जाते हैं। शुक्रवार को पिंक शौचालय को लेकर पड़ताल की गई। सबसे पहले मुख्य बाजार में जल संस्थान कार्यालय के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय को देखा गया। यहां सार्वजनिक शौचालय में भीतर महिलाओं के तीन शौचालय थे, लेकिन कर्मचारियों से पता चला महिलाएं कभी कभार ही शौचालय का प्रयोग करती है।
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करीब दो किलोमीटर की दूरी पर गीता भवन के पास एक दूसरा स्मार्ट शौचालय मिला, यहां चार शीट का महिला शौचालय ऐसा था, जैसे कभी उसका प्रयोग ही नहीं हुआ हो। शौचालय के दो वॉश बेसिन में पानी न के बराबर आ रहा था। सरकारी अस्पताल के पास स्थित सुलभ शौचालय में तीन शीट का महिला शौचालय था, लेकिन यहां भी यदा-कदा ही प्रयोग करने की बात सामने आई।

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महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था हो
रचिता, अराधना, दीपा, कृष्णा आदि ने बताया कि सार्वजनिक शौचालय का संचालन पुरुष ही करते हैं। पुरुषों की भीड़ के बीच शौचालय का प्रयोग करने में संकोच होता है। रश्मि, सृष्टि, दीप्ती ने बताया कि रात को बस से मुख्य बाजार में उतरने पर शौचालय का प्रयोग करने के लिए बड़ी हिम्मत जुटानी पड़ती है। कई बार तो शौचालय बंद मिलते हैं तो बड़ी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि चाहे शुल्क रखा जाए पर महिलाओं के शौचालय की अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

बड़ी संख्या में बाजार में आती हैं महिलाएं
जौनसार बावर और सीमांत हिमाचल क्षेत्रों का मुख्य बाजार विकासनगर है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में खरीदारी और अन्य कार्यों के लिए ग्रामीण आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं व युवतियां भी शामिल रहती है। शौचालय के अभाव में महिलाओं को परेशानी होती है। जो हैं, वहां हालात ऐसी होती है कि महिलाएं सहज महसूस नहीं करतीं।

इनका कहना है
सार्वजनिक शौचालय का प्रयोग करते हुए सहज महसूस नहीं होता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल पारित कर समान अधिकार देने की बात कही जा रही है। महिलाओं को प्रत्येक नागरिक सुविधा में 50 फीसदी का अधिकार मिलना चाहिए। अगर दो सार्वजनिक शौचालय हैं तो महिलाओं के लिए भी दो पिंक शौचालय बनाए जाए। - लक्ष्मी वर्मा, छात्र संघ अध्यक्ष, वीर शहीद केसरी चंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय

सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी बहुत होती है। ऐसे में स्वास्थ्य का विषय रहता है। खासकर ग्रामीण महिलाएं सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करने में घबराती हैं। सार्वजनिक शौचालय में महिलाओं की सुरक्षा का विषय भी रहता है। महिलाओं के लिए अलग से शौचालय बनाए जाने चाहिए। - पूजा गौड़, सामाजिक कार्यकर्ता

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मैं स्वयं महिलाओं की इस परेशानी को महसूस करती हूं। विकासनगर में सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है। पहले बड़ी मुश्किल से दो स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाया गया था। भूमि को खोजने का प्रयास किया जाएगा, जगह मिल जाती है तो पिंक शौचालय के निर्माण में कोई समस्या नहीं है। - शांति जुवांठा, अध्यक्ष, नगरपालिका, विकासनगर

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