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Dehradun News: दिन हो या रात दो किलोमीटर दूर जाकर करनी पड़ती है बात
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Iमसराड में नहीं आते मोबाइल नेटवर्क
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Iइमरजेंसी में ग्रामीणों को होती है परेशानीI
देहरादून जिले के कालसी तहसील क्षेत्र के मसराड गांव में नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं है। गांव में करीब 400 की आबादी रहती है। अगर किसी को फोन पर बात करनी हो तो गांव से दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
लोगों को कहना है गांव में किसी के बीमार होने और इमरजेंसी की स्थिति में सबसे अधिक परेशानी होती है। वहीं बच्चों को भी ऑनलाइन पढ़ाई करने और व्हाट्सएप ग्रुप में आने वाले होमवर्क के मैसेज को पढ़ने के लिए नेटवर्क क्षेत्र में आना पड़ता है। ग्रामीणों को हमेशा डर लगा रहता है कि अगर कोई दुर्घटना हुई तो प्रशासन और पुलिस को कैसे सूचना भेजेंगे।
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Iकब आती है ग्रामीणों को समस्याI
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बीमार मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन बुक करने में सबसे अधिक परेशानी होती है। गांव में यदि अचानक किसी की मौत हो जाए तो परिजनों और रिश्तेदारों को सूचना देने के लिए गांव से दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
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Iवर्जन
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Iहाईटेक जमाने में देश तरक्की कर रहा है। देश आज चांद पर भी पहुंच गया है। लेकिन मसराड गांव आज भी विकास के क्षेत्र में बहुत पीछे है। गांव में नेटवर्क कनेक्टिविटी न होने छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई में परेशानी हो रही है। इंटरनेट न चलने के कारण बच्चों का सिलेबस छूट रहा है। - रितिक चौहान, छात्र, मसराड
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Iयहां नेटवर्क कनेक्टिविटी बिल्कुल भी नहीं है। फोन भी घरों में शोपीस की तरह पड़े रहते हैं। स्थानीय लोगों को तो परेशानी है। यहां खत के आराध्य देव शिलगूर देवता का मंदिर है। जहां लोग हर रोज देव दर्शन को आते हैं। मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण श्रद्धालुओं को भी परेशानी होती है। - बीएस चौहान, मसराड
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Iनेटवर्क कनेक्टिविटी न होने से गांव आज भी विकास से बहुत दूर है। बीमारी के समय यदि किसी को वाहन बुक कराना पड़ता है तो इसके लिए गांव से दो किलोमीटर जाकर फोन करना पड़ता है। ऐसे में परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। - बिरेंद्र सिंह चौहान, मसराडI