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Dehradun News: 40 गांवों के लोग कल करेंगे नई टाउनशिप के लाभ-हानि पर मंथन
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I- भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव को लेकर लोगों में असमंजस
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I- चकराता टाउनशिप को लेकर ग्रामीणों ने नागथात में बुलाई बैठकI
प्रदेश सरकार नया चकराता बसाने की तैयार कर चुकी है। लेकिन नई टाउनशिप के भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में असमंजस बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीण अपने भूमि अधिकार को लेकर भी चिंतित है। इस सभी पहलुओं पर मंथन के लिए 31 अक्तूबर को नागथात में एक बैठक बुलाई गई है। बैठक में कालसी और चकराता तहसील क्षेत्र के 40 गांवों के ग्रामीण प्रतिभाग करेंगे।
चकराता क्षेत्र में नई टाउनशिप को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद आवास विकास ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी थी। पुरोड़ी से लखवाड़ तक टॉउनशिप बसाने की जिम्मेदारी मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को दी गई है। टाउनशिप बनने की सुगबुगाहट के साथ स्थानीय लोग इसका नफा और नुकसान टटोलने में लगे है।
हालांकि अभी टाउनशिप का किसी ने खुले तौर पर विरोध या समर्थन नहीं किया है। टाउनशिप में कालसी तहसील के 32 और चकराता तहसील के आठ गांव शामिल किए गए हैं।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र है। यहां गैर जनजातीय क्षेत्र के लोगों के भूमि खरीदने पर प्रतिबंध लगा है। ऐसे में टाउनशिप का मास्टर प्लान तैयार होने के दौरान लोगों को अपने भूमि के अधिकार को लेकर असमंजस है। लोग यह भी सोच रहे हैं कि टाउनशिप का भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।
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तहसील कालसी के खत बहलाड के अध्यक्ष मोहर सिंह चौहान ने बताया कि नई चकराता टाउनशिप के तहत आने वाले सभी गांवों को एक बैठक आगामी 31 अक्तूबर को नागथात में बुलाई गई है। बताया कि बैठक में नवीन चकराता टाउनशिप की पूरी जानकारी प्राप्त करने के साथ जनजातीय क्षेत्र में उसके लाभ और हानि पर चर्चा की जाएगी।
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I- चकराता टाउनशिप को लेकर ग्रामीणों ने नागथात में बुलाई बैठकI
प्रदेश सरकार नया चकराता बसाने की तैयार कर चुकी है। लेकिन नई टाउनशिप के भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में असमंजस बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीण अपने भूमि अधिकार को लेकर भी चिंतित है। इस सभी पहलुओं पर मंथन के लिए 31 अक्तूबर को नागथात में एक बैठक बुलाई गई है। बैठक में कालसी और चकराता तहसील क्षेत्र के 40 गांवों के ग्रामीण प्रतिभाग करेंगे।
चकराता क्षेत्र में नई टाउनशिप को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद आवास विकास ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी थी। पुरोड़ी से लखवाड़ तक टॉउनशिप बसाने की जिम्मेदारी मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को दी गई है। टाउनशिप बनने की सुगबुगाहट के साथ स्थानीय लोग इसका नफा और नुकसान टटोलने में लगे है।
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हालांकि अभी टाउनशिप का किसी ने खुले तौर पर विरोध या समर्थन नहीं किया है। टाउनशिप में कालसी तहसील के 32 और चकराता तहसील के आठ गांव शामिल किए गए हैं।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र है। यहां गैर जनजातीय क्षेत्र के लोगों के भूमि खरीदने पर प्रतिबंध लगा है। ऐसे में टाउनशिप का मास्टर प्लान तैयार होने के दौरान लोगों को अपने भूमि के अधिकार को लेकर असमंजस है। लोग यह भी सोच रहे हैं कि टाउनशिप का भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।
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तहसील कालसी के खत बहलाड के अध्यक्ष मोहर सिंह चौहान ने बताया कि नई चकराता टाउनशिप के तहत आने वाले सभी गांवों को एक बैठक आगामी 31 अक्तूबर को नागथात में बुलाई गई है। बताया कि बैठक में नवीन चकराता टाउनशिप की पूरी जानकारी प्राप्त करने के साथ जनजातीय क्षेत्र में उसके लाभ और हानि पर चर्चा की जाएगी।