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ऐगै फिर हरेला, मिलीजुली मनौला, ऐगै फिर हरेला, डालि बि लगौला,ॐ
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अमर उजाला व सांस्कृतिक संस्था धाद की ओर से हरेला महापर्व को लेकर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला मेें सोमवार को शिक्षांकुर ग्लोबल स्कूल के नौनिहालों के साथ हरेला महापर्व धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर लोक गायिका रेखा उनियाल धस्माना ने जहां बच्चों को हरेला झुमेलो के बोल सुनाएं, वहीं नौनिहालों ने थडिया चौंफला के कदम भी सीखे।
लोक गायिका धस्माना ने बच्चों को हरेला पर एक स्वरचित चौंफला गीत ऐगै फिर हरेला, मिलीजुली सब्बि मनौला, ऐगै फिर हरेला, डालि बि लगौला, गाकर भी सुनाया। धाद के सचिव तन्मय मंमगाई ने संवाद शैली में बच्चों को हरेला के महत्व के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की जानकारी दी। कहा कि आज के बच्चे ही कल राज्य की धरोहर संभालेंगे, इसलिए बालपन में उन्हें अपनी परंपराओं को सौंपना होगा। धाद की सदस्य अर्चना ग्वारी ने कहा कि सभी बच्चे आज घर जाकर अपने माता-पिता से अनुरोध करेंगे कि वे भी देवभूमि में उगाए जाने वाले अन्न का भोजन बनाएं। शांति बिंजोला ने देवभूमि के वृक्षों के बारे में जानकारी दी। गढ़वाली व्यंजन विशेषज्ञा मंजू काला ने पहाड़ी अनाज के महत्व के बारे में बताया।
रेनू नेगी ने बच्चों, गुरुजनों को हरेला पर्व की बधाई देते हुए कविता सुनाई। धाद टीम की ओर से बच्चों के लिए सवाल जवाब राउंड का भी आयोजन किया गया। विजेता बच्चों को पुरस्कार के तौर पर कहानियों की पुस्तक भेंट की गई। इस मौके पर स्कूल निदेशक डॉ. जयंत नवानी ने धन्यवाद देते हुए हरेला को देशभर में मनाने की बात कही। इस दौरान स्कूल परिसर में पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में प्रधानाचार्या रचना जोशी, शैली पांथरी, बीना कंडारी, गणेश उनियाल, महावीर सिंह रावत, मंजू काला, एसएन जोशी, शिक्षिका मेघा शर्मा, ईशा सेठी, पूजा खन्ना, प्रीति बंसल, मनीषा चुघ, अमरदीप कौर आदि मौजूद थे।
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मुंबई, ठाणे, बीकानेर में भी मनाया हरेला
हरेला भारत के तहत गढ़वाल एकता समिति ठाणे की ओर से पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन रैला देवी मंदिर के प्रांगण में किया गया। कार्यक्रम में जगदीश प्रसाद पोखरियाल, जसवंत सिंह नेगी, दयासागर धस्माना, प्रकाश ढौंडियाल आदि मौजूद थे। वहीं, राजस्थान के बीकानेर में भी हरेला महापर्व मनाया गया।
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लोक गायिका धस्माना ने बच्चों को हरेला पर एक स्वरचित चौंफला गीत ऐगै फिर हरेला, मिलीजुली सब्बि मनौला, ऐगै फिर हरेला, डालि बि लगौला, गाकर भी सुनाया। धाद के सचिव तन्मय मंमगाई ने संवाद शैली में बच्चों को हरेला के महत्व के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की जानकारी दी। कहा कि आज के बच्चे ही कल राज्य की धरोहर संभालेंगे, इसलिए बालपन में उन्हें अपनी परंपराओं को सौंपना होगा। धाद की सदस्य अर्चना ग्वारी ने कहा कि सभी बच्चे आज घर जाकर अपने माता-पिता से अनुरोध करेंगे कि वे भी देवभूमि में उगाए जाने वाले अन्न का भोजन बनाएं। शांति बिंजोला ने देवभूमि के वृक्षों के बारे में जानकारी दी। गढ़वाली व्यंजन विशेषज्ञा मंजू काला ने पहाड़ी अनाज के महत्व के बारे में बताया।
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रेनू नेगी ने बच्चों, गुरुजनों को हरेला पर्व की बधाई देते हुए कविता सुनाई। धाद टीम की ओर से बच्चों के लिए सवाल जवाब राउंड का भी आयोजन किया गया। विजेता बच्चों को पुरस्कार के तौर पर कहानियों की पुस्तक भेंट की गई। इस मौके पर स्कूल निदेशक डॉ. जयंत नवानी ने धन्यवाद देते हुए हरेला को देशभर में मनाने की बात कही। इस दौरान स्कूल परिसर में पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में प्रधानाचार्या रचना जोशी, शैली पांथरी, बीना कंडारी, गणेश उनियाल, महावीर सिंह रावत, मंजू काला, एसएन जोशी, शिक्षिका मेघा शर्मा, ईशा सेठी, पूजा खन्ना, प्रीति बंसल, मनीषा चुघ, अमरदीप कौर आदि मौजूद थे।
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मुंबई, ठाणे, बीकानेर में भी मनाया हरेला
हरेला भारत के तहत गढ़वाल एकता समिति ठाणे की ओर से पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन रैला देवी मंदिर के प्रांगण में किया गया। कार्यक्रम में जगदीश प्रसाद पोखरियाल, जसवंत सिंह नेगी, दयासागर धस्माना, प्रकाश ढौंडियाल आदि मौजूद थे। वहीं, राजस्थान के बीकानेर में भी हरेला महापर्व मनाया गया।