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Dehradun News: एनडीबीआर में जैव विविधता निगरानी अभियान को नहीं जा सकी टीम

Tue, 16 Dec 2025 09:23 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 16 Dec 2025 09:23 PM IST
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The team could not go for biodiversity monitoring campaign in Nanda Devi National Park.
- हर 10 साल बाद नंदादेवी नेशनल पार्क में टीम को भेजा जाता है, 1983 से भेजे जा रहे विशेषज्ञों के दल
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- आटोमैटिक वेदर स्टेशन की जरूरत थी मगर नहीं हो सका काम, माैसम को बताया जा रहा कारण
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। नंदा देवी बायो स्फीयर रिजर्व (एनडीबीआर) में जैव विविधता निगरानी अभियान के लिए इस बार टीम नहीं जा सकी है। पिछले अभियानों के बाद आटोमैटिक वेदर स्टेशन की जरूरत थी मगर इस पर भी काम नहीं हो सका है। इस संबंध में सचिव वन सी रविशंकर ने बताया कि इस अभियान को लेकर प्रयासरत थे, लेकिन मानसून के चलते तत्काल अभियान संभव नहीं हो सका था। इस संबंध में जल्द बैठक होगी।
1982 में नंदा देवी नेशनल पार्क बना था। इससे पहले 1981 में आखिरी बार पर्वतारोहियों का दल गया था, जिसके बाद क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए पर्यटक और लोगाें की आवाजाही को प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके बाद नंदा देवी नेशनल पार्क में जैव विविधता का हाल जानने के लिए 1983 से टीमों को भेजे जाने का क्रम शुरू हुआ। 1993 और 2003 में टीम को जैव विविधता निगरानी अभियान के लिए भेजा गया। वर्ष-2013 में केदारनाथ आपदा आने के कारण टीम को नहीं भेजा गया था। 2015 में भारतीय वन्यजीव संस्थान, गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के विशेषज्ञों के साथ वन विभाग, आईटीबीपी की टीम गई थी। चार हजार मीटर सरसो पातल तक पहुंचकर टीम ने विवरण जुटाए थे। 2025 में टीम को फिर जाना था, लेकिन टीम नहीं गई। ऐसे में दस सालों में वहां पर क्या बदलाव हुआ, जैव विविधता की स्थिति कैसी है इसके बारे में जानकारी नहीं हो सकी। अब अगले वर्ष टीम को भेजे जाने की बात कही जा रही है।
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इंसेट
आलवेदर स्टेशन की स्थापना का जिक्र, पर लगा नहीं
देहरादून। सामान्य तौर पर अभियान 25 दिन का होता है। इस दौरान विशेषज्ञ पूरे क्षेत्र में वृक्ष, घास के मैदान, पशु-पक्षी, हिमनद समेत अन्य जानकारी तय मानकों के अनुसार जुटानी होती है। वर्ष-2015 में अभियान के बाद रिपोर्ट तैयार की गई थी। जिससे ज्यादा बड़े क्षेत्र को कवर किया जा सके। साथ ही आलवेदर स्टेशन का ही उल्लेख किया गया था, पर यह भी स्थापित नहीं हो सका है।
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मंत्रालय को भेजी जाती है रिपोर्ट
देहरादून। रिपोर्ट को अलग- अलग संस्थान के विशेषज्ञ तैयार करते हैं। इस रिपोर्ट को संकलित करने का काम भारतीय वन्यजीव संस्थान व अंतिम रूप देने का कार्य वन विभाग करता है। बताया जाता है कि फिर इस रिपोर्ट को पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जाता है।
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