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Dehradun News: कैंट क्षेत्रों के सिविल एरिया शामिल होने पर बढ़ेगा निगम का दायरा
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कैंट क्षेत्रों के सिविल एरिया के निगम में शामिल होने पर निगम का दायरा भी बढ़ जाएगा। वर्तमान में निगम में सौ वार्ड हैं। वार्डों की संख्या बढ़ाने की संभावना तो कम हैं, लेकिन वार्डों का परिसीमन कर कैंट क्षेत्रों के वार्डों को वर्तमान वार्डों में शामिल किया जा सकता है। निगम के कई वार्ड ऐसे हैं जिनकी आबादी कम है। वार्डों का परिसीमन कर ऐसे वार्डों का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
पहले निगम के 60 वार्ड थे। वर्ष 2018 में नगर निगम में 72 गांवों को शामिल किया गया। जिसके बाद वार्डों की संख्या बढ़कर 100 हो गई। अब कैंट क्षेत्र के सिविल एरिया को नगर निगम में शामिल करने की तैयारी पूरी हो चुकी हैं। 100 वार्डों में संसाधनों की कमी को पूरा करना निगम के लिए पहले ही चुनौती बना है। ऐसे में नए वार्ड बढ़ाए जाने की उम्मीद कम है। यदि वार्डों की संख्या बढ़ाते हैं तो प्रस्ताव विधानसभा में लाना पड़ेगा। जिसमें लंबा वक्त लगेगा। इसलिए संभावना यही है कि वार्डों का दोबारा से परिसीमन किया जाएगा। क्योंकि निगम के कई वार्डों ऐसे हैं जो काफी छोटे हैं। इसलिए जो छोटे वार्ड है, उनमें दूसरे वार्डों के क्षेत्र मिलाकर और कैंट के सिविल क्षेत्रों को आसपास के क्षेत्रों में शामिल किया जा सकता है।
कैंट क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर
कैंट बोर्ड के सिविल एरिया में रहने वाले अधिकांश लोग भी रक्षा मंत्रालय के इस निर्णय से खुश हैं। उन्हें भरोसा है कि नगर निगम का हिस्सा बनने से उनके वार्डों में विकास कार्य में तेजी आएगी। कैंट बोर्ड में बजट व संसाधनों का अभाव होने से कारण विकास कार्य तेजी से नहीं हो पाते हैं। प्रेमनगर क्षेत्र के स्थानीय निवासी राजेश रावत ने बताया कि कैंट क्षेत्र के लोग लंबे समय से नगर निगम में शामिल करने की मांग कर रहे थे। कैंट क्लेमेंटटाउन निवासी महेश पांडे ने कहा कि रक्षा मंत्रालय का फैसला स्वागत योग्य है। इससे अब सिविल क्षेत्रों में सीवर, पेयजल सहित तमाम सुविधाओं का लाभ मिल पाएगा। क्लेमेंटटाउन में सामुदायिक केंद्र, मच्छीतालाब, फुटबॉल ग्राउंड और अस्पताल को निगम में शामिल करने की मांग की है। कैंट निवासी सुनील कुमार, गढ़ी-डाकरा निवासी अनिल मोटे ने कहा कि सिविल क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल किया जाना चाहिए।
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पहले निगम के 60 वार्ड थे। वर्ष 2018 में नगर निगम में 72 गांवों को शामिल किया गया। जिसके बाद वार्डों की संख्या बढ़कर 100 हो गई। अब कैंट क्षेत्र के सिविल एरिया को नगर निगम में शामिल करने की तैयारी पूरी हो चुकी हैं। 100 वार्डों में संसाधनों की कमी को पूरा करना निगम के लिए पहले ही चुनौती बना है। ऐसे में नए वार्ड बढ़ाए जाने की उम्मीद कम है। यदि वार्डों की संख्या बढ़ाते हैं तो प्रस्ताव विधानसभा में लाना पड़ेगा। जिसमें लंबा वक्त लगेगा। इसलिए संभावना यही है कि वार्डों का दोबारा से परिसीमन किया जाएगा। क्योंकि निगम के कई वार्डों ऐसे हैं जो काफी छोटे हैं। इसलिए जो छोटे वार्ड है, उनमें दूसरे वार्डों के क्षेत्र मिलाकर और कैंट के सिविल क्षेत्रों को आसपास के क्षेत्रों में शामिल किया जा सकता है।
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कैंट क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर
कैंट बोर्ड के सिविल एरिया में रहने वाले अधिकांश लोग भी रक्षा मंत्रालय के इस निर्णय से खुश हैं। उन्हें भरोसा है कि नगर निगम का हिस्सा बनने से उनके वार्डों में विकास कार्य में तेजी आएगी। कैंट बोर्ड में बजट व संसाधनों का अभाव होने से कारण विकास कार्य तेजी से नहीं हो पाते हैं। प्रेमनगर क्षेत्र के स्थानीय निवासी राजेश रावत ने बताया कि कैंट क्षेत्र के लोग लंबे समय से नगर निगम में शामिल करने की मांग कर रहे थे। कैंट क्लेमेंटटाउन निवासी महेश पांडे ने कहा कि रक्षा मंत्रालय का फैसला स्वागत योग्य है। इससे अब सिविल क्षेत्रों में सीवर, पेयजल सहित तमाम सुविधाओं का लाभ मिल पाएगा। क्लेमेंटटाउन में सामुदायिक केंद्र, मच्छीतालाब, फुटबॉल ग्राउंड और अस्पताल को निगम में शामिल करने की मांग की है। कैंट निवासी सुनील कुमार, गढ़ी-डाकरा निवासी अनिल मोटे ने कहा कि सिविल क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल किया जाना चाहिए।
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