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Dehradun News: दो साल से भेजी जा रही डिमांड, ऑपरेशन के लिए नहीं मिल रही दूरबीन

Thu, 14 Mar 2024 12:40 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 14 Mar 2024 12:40 AM IST
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The hospital administration has been sending demands for
Iउप जिला अस्पताल में नहीं हो रहे दूरबीन विधि से ऑपरेशन
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Iदूरबीन विधि से ऑपरेशन से कम समय में होती है रिकवरीI

उप जिला अस्पताल में दूरबीन विधि से ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से बीते दो साल से मुख्यालय को लेप्रोस्कोप और यूरेटेरोस्कोप की डिमांड भेजी जा रही है, लेकिन अब तक दोनों उपकरण नहीं मिल पाए हैं। दूरबीन विधि के ऑपरेशन के बाद मरीजों को दो से तीन दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाता है। अगर इस विधि से ऑपरेशन होते तो शल्य चिकित्सा वार्ड में मरीजों का भार कम होता और ऑपरेशन की संख्या भी बढ़ती।



अब चिकित्सक और मरीज सामान्य ओपन ऑपरेशन के बजाय दूरबीन विधि से होने वाली ऑपरेशन को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि अब कई सरकारी अस्पतालों में भी किडनी की पथरी, पित्त की थैली, अपेडिक्स, हर्निया, गर्भाशय, मूत्रनली के ऑपरेशन दूरबीन विधि से किए जा रहे हैं। सामान्य ओपन ऑपरेशन में मरीज के पेट पर करीब तीन से छह इंच तक का चीरा लगाया जाता है। जबकि दूरबीन विधि से होने वाले ऑपरेशन में एक इंच से भी कम का चीरा लगाया जाता है।
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इसके अलावा सामान्य ओपन ऑपरेशन में 300 से 500 मिलीलीटर रक्त की हानि होती है। वहीं, दूरबीन विधि के ऑपरेशन में 50 से 100 मिलीलीटर रक्त निकलता है। दूरबीन विधि के ऑपरेशन में मरीज की रिकवरी तेज होती है। सामान्य ओपन ऑपरेशन में मरीज एक सप्ताह से 10 दिनों में अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाता है। मरीजों का पूरी तरह से स्वास्थ्य होने में करीब छह सप्ताह का समय लगता है।
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उप जिला अस्पताल में हर माह करीब 20 बड़े ऑपरेशन होते हैं। इनमें अधिकांश पथरी, पित्त की थैली पथरी, अपेडिक्स, हर्निया, गर्भाशय, मूत्र नली के ऑपरेशन किए जाते हैं। जबकि हर माह करीब 50 छोटे ऑपरेशन होते हैं। पूर्व में कुछ समय तक अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. नरेंद्र सिंह चौहान अपनी निजी लेप्रोस्कोपिक मशीन से मरीजों के ऑपरेशन करते थे, लेकिन फिर मशीन खराब हो गई। अब अस्पताल में दूरबीन विधि से ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार लेप्रोस्कोप और यूरेटेरोस्कोप की मांग कर रहा है।




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Iमुख्यालय को लेप्रोस्कोप और यूरेटेरोस्कोप की डिमांड दो साल से लगातार भेजी जा रही है। उपकरण मिलने से मरीजों को सुविधा मिलेगी। मरीजों की रिकवरी में कम समय लगने से ऑपरेशन की संख्या भी बढ़ने की संभावना है।
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I-डॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला अस्पतालI
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