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Dehradun News: कैंट बोर्डों को नगर निकायों में शामिल करने से कर्मचारियों को सता रही भविष्य की चिंता

Tue, 27 Jun 2023 01:48 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jun 2023 01:48 AM IST
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The employees are worried about the future due to the inclusion of cantt boards in the municipal bodies
कैंट बोर्डों को नगर निकायों में शामिल करने के रक्षा मंत्रालय के निर्णय से कैंट बोर्डों में कार्यरत कर्मचारियों को भविष्य की चिंता सताने लगी है। सेवा शर्तों, ड्यूज, मृतक आश्रितों की नियुक्ति सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर ऑल इंडिया कैंट बोर्ड इंपलाइज फैडरेशन ने केंद्रीय श्रमायुक्त के यहां वाद दायर करते हुए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। फैडरेशन 29 जून को एक दिवसीय प्रदर्शन करेगा। इसके बाद 15 जुलाई से देशभर के 61 कैंटों के कर्मचारी आंदोलन शुरू कर देंगे। उनका आरोप है कि इस संबंध में न तो फैडेरशन को विश्वास में लिया गया और न ही किसी प्रकार की चर्चा हुई।
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दरअसल, रक्षा मंत्रालय ने कैंट बोर्डों को खत्म कर उन्हें नगर निगम या निकायों में शामिल करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय के इस निर्णय से कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। फैडरेशन का कहना है कि अगर कैंट बोर्डों का विलय स्थानीय निकायों में होता है तो कैंट बोर्डों में कार्यरत कर्मचारियों की सेवा शर्तो में बदलाव हो जाएगा। कर्मचारियों की वरिष्ठता, वेतन संरक्षण, पदोन्नति, अवकाश का नवीनीकरण व पेंशन आदि प्रभावित होगी। फैडरेशन के महामंत्री राम पांडे ने कहा कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश के योग कैंट का विलय कर्मचारियों एवं विभाग के मध्य, बिना किसी औपचारिक समझौते के कर दिया गया। कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति, रक्षा मंत्रालय, केंद्र सरकार, राज्य सरकार या स्थानीय निकाय में विलय का कोई विकल्प नहीं दिया गया।
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इन मुद्दों पर स्थिति साफ करने की मांग
- कई कर्मचारियों को कैंट बोर्डों में काम करते हुए 20 से 30 वर्ष हो गए हैं। लेकिन, अभी तक उन्हें एसीपी का लाभ नहीं मिला है। क्या निकायों में शामिल होने से उन्हें इसका लाभ मिलेगा।
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- कई कर्मचारियों की पदोन्नति सालों से लंबित है। निकायों में शामिल होने से उनकी सेवा शर्तों को गिना जाएगा।
- मृतक आश्रितों के कई प्रकरण अभी तक लंबित हैं। क्या निकायों में शामिल होने से मृतक आश्रितों को नियुक्ति का अधिकार मिलेगा।
- हिमाचल के योग कैंट के विलय होने के बाद वहां के कर्मचारियों को निकायों में दो साल के प्रोविजनल पीरिएड पर रखा गया है। जबकि सालों से कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता प्रभावित होगी।
- इसके अलावा कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति, पेंशन, आदि का लाभ कौन देगा, कैंट या निकाय।
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