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तो इसलिए तोड़ दी 77 साल पुरानी परंपरा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 20 Oct 2013 02:26 PM IST
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गांधी परिवार के साथ ही देश की अन्य हस्तियों को गुरुमंत्र देने वाले देहरादून के दून स्कूल ने सालों से आ रही परंपरा तोड़ दी।
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77 सालों बाद पहली बार ऐसा हुआ कि समारोह के समापन पर शाही भोज का आयोजन नहीं किया गया। इसकी बड़ी वजह प्रदेश में जून माह में आई आपदा बताई जा रही है।
आपदा में देखा लोगों का दर्द
उत्तराखंड में जब आपदा आई थी तो उस वक्त दून स्कूल की समर वेकेशन चल रही थी। हेडमास्टर ने करीब 20 छात्रों की छुट्टियां रद्द कर उनके साथ आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पहुंच गए थे। बोर्ड अध्यक्ष गौतम थापर भी आपदाग्रस्त क्षेत्रों तक गए। उन्होंने लोगों की पीड़ा महसूस की तो स्कूल के समारोह में उसकी झलक देखने को मिली।
समारोह के अंतिम कार्यक्रम की शुरुआत आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजली से हुई। दो मिनट के मौन के बाद कार्यक्रम हुआ। इसके बाद स्थापना से चली आ रही परंपरा को आपदा की वजह से तोड़ दिया गया। सूत्रों के मुताबिक शाही डिनर में करीब तीन हजार अभिभावक, छात्र और गणमान्य लोग शिरकत करते हैं।
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भोज में आता है करीब 40 लाख का खर्च
खाना बनाने के लिए विशेष तौर पर दिल्ली से विशेषज्ञ कुक बुलाए जाते हैं। शाही भोज पर आने वाले करीब 40 लाख रुपए के खर्च को स्कूल ने आपदा पीड़ितों की मदद के लिए दान करने की घोषणा की है। समारोह समापन के बाद सभी अभिभावक बच्चों के साथ बाहर रेस्टोरेंट्स में खाना खाने के लिए गए।
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