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Dehradun News: ऊंचाई वाले इलाकों की बर्फबारी से मैदानी इलाकों में नहीं गिरा तापमान
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Iमौसम के बदले पैटर्न और सामान्य तापमान में मामूली गिरावट का पड़ा असर
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मौसम के बदले पैटर्न से तापमान में भी असर देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि बीते कुछ दिनों प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी से मैदानी इलाकों के तापमान में कोई खास गिरावट देखने को नहीं मिला। उधर, नवंबर माह में अब तक की विंटर रेन भी सामान्य से कम ही दर्ज की गई है। वहीं, कुछ जिलों में तो बारिश ही नहीं हुई।
विशेषज्ञों का कहना है, तेजी से बदलती जलवायु परिस्तिथियां पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रही हैं। इसके चलते ग्लेशियर का तेजी से पिघलना, बढ़ता तापमान, वर्षा के बदलते पैटर्न, सूखती नदियां, बाढ़, जंगल की आग जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। मौसम के बदलते इस पैटर्न के आधार पर ही वैज्ञानिकों ने आने वाले दस सालों में सामान्य तापमान में .5 डिग्री की बढ़ोतरी का अंदाजा लगाया है। बीती 11 नवंबर को केदारनाथ धाम में करीब चार इंच और ऊंचाई वाले इलाकों में भी बर्फबारी हुई थी। मैदानी इलाकों के सामान्य तापमान में दो-तीन डिग्री की ही गिरावट दर्ज की गई थी। इससे पहले पोस्ट मानसून में 16 अक्तूबर को हुई बारिश मात्र से सामान्य तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। अकेले देहरादून जिले में तापमान नौ डिग्री तक गिर गया था। सोमवार के आंकड़ों की बात करें तो देहरादून का अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री रहा, जो सामान्य से दो डिग्री कम है। टिहरी जिले का अधिकतम तापमान तीन डिग्री की कमी के साथ 17.8 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि पंतनगर का 28.6 और मुक्तेश्वर का 17.5 डिग्री दर्ज किया गया, जो कि सामान्य है।
Iबढ़ते तापमान में विशेषज्ञों ने जताई थी चिंताI
इस साल 27 अक्तूबर को दून में क्लाइमेंट ट्रेंड्स की ओर से उत्तराखंड पर जलवायु परिवर्तन और इसके बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और सतत विकास विषय पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने चिंता जताई थी। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसके पटनायक, मुख्य वन संरक्षक कपिल कुमार जोशी, मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. कालाचंद साईं समेत अन्य विशेषज्ञों ने इस बात को माना था कि आने वाले दस साल में सामान्य तापमान में .5 डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
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Iहाल के दिनों में ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बारिश व बर्फबारी से मैदानी इलाकों के तापमान में कोई खास असर देखने को नहीं मिला। सामान्य तापमान में सिर्फ दो से चार डिग्री तक की ही कमी देखने को मिली है। इसका एक मुख्य कारण नवंबर माह में अभी तक विंटर रेन का भी कम होना है। 17 नवंबर तक प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहने के आसार है। जिसके चलते तापमान में कोई खास गिरावट दर्ज नहीं की जाएगी। - विक्रम सिंह, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्रI
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मौसम के बदले पैटर्न से तापमान में भी असर देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि बीते कुछ दिनों प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी से मैदानी इलाकों के तापमान में कोई खास गिरावट देखने को नहीं मिला। उधर, नवंबर माह में अब तक की विंटर रेन भी सामान्य से कम ही दर्ज की गई है। वहीं, कुछ जिलों में तो बारिश ही नहीं हुई।
विशेषज्ञों का कहना है, तेजी से बदलती जलवायु परिस्तिथियां पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रही हैं। इसके चलते ग्लेशियर का तेजी से पिघलना, बढ़ता तापमान, वर्षा के बदलते पैटर्न, सूखती नदियां, बाढ़, जंगल की आग जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। मौसम के बदलते इस पैटर्न के आधार पर ही वैज्ञानिकों ने आने वाले दस सालों में सामान्य तापमान में .5 डिग्री की बढ़ोतरी का अंदाजा लगाया है। बीती 11 नवंबर को केदारनाथ धाम में करीब चार इंच और ऊंचाई वाले इलाकों में भी बर्फबारी हुई थी। मैदानी इलाकों के सामान्य तापमान में दो-तीन डिग्री की ही गिरावट दर्ज की गई थी। इससे पहले पोस्ट मानसून में 16 अक्तूबर को हुई बारिश मात्र से सामान्य तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। अकेले देहरादून जिले में तापमान नौ डिग्री तक गिर गया था। सोमवार के आंकड़ों की बात करें तो देहरादून का अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री रहा, जो सामान्य से दो डिग्री कम है। टिहरी जिले का अधिकतम तापमान तीन डिग्री की कमी के साथ 17.8 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि पंतनगर का 28.6 और मुक्तेश्वर का 17.5 डिग्री दर्ज किया गया, जो कि सामान्य है।
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Iबढ़ते तापमान में विशेषज्ञों ने जताई थी चिंताI
इस साल 27 अक्तूबर को दून में क्लाइमेंट ट्रेंड्स की ओर से उत्तराखंड पर जलवायु परिवर्तन और इसके बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और सतत विकास विषय पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने चिंता जताई थी। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसके पटनायक, मुख्य वन संरक्षक कपिल कुमार जोशी, मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. कालाचंद साईं समेत अन्य विशेषज्ञों ने इस बात को माना था कि आने वाले दस साल में सामान्य तापमान में .5 डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
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Iहाल के दिनों में ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बारिश व बर्फबारी से मैदानी इलाकों के तापमान में कोई खास असर देखने को नहीं मिला। सामान्य तापमान में सिर्फ दो से चार डिग्री तक की ही कमी देखने को मिली है। इसका एक मुख्य कारण नवंबर माह में अभी तक विंटर रेन का भी कम होना है। 17 नवंबर तक प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहने के आसार है। जिसके चलते तापमान में कोई खास गिरावट दर्ज नहीं की जाएगी। - विक्रम सिंह, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्रI