उत्तराखंड उपचुनाव: अंतिम दिन सीएम को प्रचार में उतारकर भाजपा ने झोंकी ताकत, अब डोर टू डोर कंपेन
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थराली विधानसभा उपचुनाव का प्रचार थम गया है और अब प्रत्याशी और उनके समर्थक डोर टू डोर कंपेन करेंगे। उपचुनाव के लिए 28 मई को मतदान होना हैं। शनिवार को प्रचार के आखिरी दिन भाजपा ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मैदान में उतारा।
भाजपा के लिए थराली का समर नाक का सवाल बना हुआ है। इस चुनाव को प्रदेश सरकार के कामकाज के ‘लिटमस टेस्ट’ के तौर पर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सियासी प्रेक्षक चुनाव परिणाम का आकलन त्रिवेंद्र सरकार की लोकप्रियता के ग्राफ से जोड़कर देखेंगे।
यही वह दबाव है, जिसने भाजपा के सभी दिग्गजों और सरकार के सारे मंत्रियों को थराली की राह दिखाई है। सरकार के तकरीबन सभी मंत्रियों ने थराली में भाजपा प्रत्याशी मुन्नी देवी के समर्थन में प्रचार किया।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत पार्टी के कई वरिष्ठ विधायकों को थराली के प्रचार में झोंका गया। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने दो हफ्ते तक चुनाव क्षेत्र में कैंप किया और उसके बाद वह मुख्यमंत्री के साथ दो दिन प्रचार में रहे। उपचुनाव के चुनाव प्रभारी उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी वहां पिछले कई दिनों से डेरा जमाए हुए हैं। कुल मिलाकर प्रचंड बहुमत वाली भाजपा अपनी इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने के लिए ऐडी चोटी का जोर लगाए हुए है।
पिछले दो चुनाव में वोटों का अंतर
भाजपा अध्यक्ष भट्ट का शानदार जीत का दावा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने थराली विधानसभा उपचुनाव में पार्टी की शानदार जीत का दावा किया है। थराली से चुनाव प्रचार के बाद लौटे भट्ट ने कहा कि उपचुनाव में जनता भाजपा के साथ है। उन्होंने दावा किया कि मतदाता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किए जा रहे कार्यों और योजनाओं को लेकर उत्साहित हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा सवा वर्ष में किए गए कार्यों के प्रति भी संतुष्ट है। पूरे क्षेत्र का भ्रमण करने और जनता से सीधे संवाद से उन्हें पूरा विश्वास है कि भाजपा की जीत होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने सोची समझी साजिश के तहत जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया।
जीत और लीड के होंगे सियासी मायने
देहरादून। थराली विधानसभा उपचुनाव की जीत और लीड दोनों के मायने हैं। यह सीट भाजपा के कब्जे वाली है और इसलिए उस पर जीत के साथ बड़ी बढ़त लेने का भी दबाव है। कांग्रेस पर उस तरह का दबाव बेशक न हो, लेकिन संगठन के मनोबल के लिहाज से यह उपचुनाव उसके लिए अवसर की तरह है। उपचुनाव को जिस उत्साह और आक्रामकता के साथ उसने लड़ा है, उसने प्रचंड बहुमत वाली भाजपा को पूरी ताकत लगाने के लिए मजबूर कर दिया है। अब यह 31 मई को मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि प्रत्याशी की छवि और पूर्व सरकार में कराए गए कार्यों के जिस मुद्दे पर उसने चुनाव लड़ा, उसका उसे कितना लाभ मिला। लेकिन यह चुनाव उसके लिए निकाय चुनाव और लोक सभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से खासा अहम माना जा रहा है। जहां तक भाजपा का मसला है तो उपचुनाव में उसकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
पिछले दो चुनाव में वोटों का अंतर
वर्ष भाजपा कांग्रेस लीड
2012 31.59 32.86 673
2017 45.37 36.87 4858