टेस्ट पास करो, वरना भूल जाओ ड्राइविंग लाइसेंस
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प्रदेश में अब ड्राइविंग लाइसेंस बनाना अब मुश्किल होने वाला है। अब तक सिर्फ वाणिज्यिक वाहन चालकों को ही सिमुलेटर पर वाहन चलाने की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती थी। लेकिन अगले कुछ महीनों में निजी वाहन चालकों को भी इसे पार करना होगा।
प्रदेश के सभी संभागीय परिवहन कार्यालयों (देहरादून, पौड़ी, हल्द्वानी और अल्मोड़ा) में ये सिमुलेटर जल्द लग जाएंगे। परिवहन मुख्यालय के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए 50 लाख का बजट भी तय किया गया है।
यह है सिमुलेटर
सिमुलेटर वीडियो गेम की तरह का एक खास उपकरण है, जो किसी कार की तरह दिखता है। कार की तरह इसमें स्टीयरिंग, ब्रेक, डैश बोर्ड और अन्य सभी वो बटन, उपकरण होते हैं जो किसी कार में रहते हैं।
फ्रंट मिरर टीवी स्क्रीन की तरह होता है, जिस पर सड़क चलती र्हुई नजर आती है। चालक ड्राइविंग सीट पर बैठकर कार की तरह इसे चलाता है तो स्क्रीन पर आम सड़कों की तरह बाधाएं, स्पीड ब्रेकर, लालबत्ती आदि आते हैं।
फेल हुए तो दोबारा आवेदन
सिमुलेटर पर परीक्षा देने वाले आवेदक अगर पास नहीं हुए तो उन्हें परिवहन कार्यालय से कुछ माह का समय दिया जाएगा। यह अवधि बीतने के बाद वे दोबारा लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, फिर उन्हें इस परीक्षा से गुजरना होगा।
आटोमेटेड लेन बता देगी वाहन की खराबी
परिवहन मुख्यालय के ऋषिकेश में आटोमेटेड टेस्टिंग लेन बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल चुकी है। यह सड़क की तरह दिखने वाली एक खास मशीन होगी, जिस पर पर्वतीय मार्गों पर चलने वाले वाहनों को गुजारा जाएगा।
मशीन विशेष मानकों के आधार पर वाहन का परीक्षण करेगी और खराबी को तुरंत पकड़ लेगी। इससे पर्वतीय रूटों पर हादसों में कमी लाई जा सकेगी।
हल्द्वानी में बनेगा आईएसबीटी
परिवहन मुख्यालय की कुछ अन्य योजनाओं को भी मंजूरी मिली है। इनमें उत्तरकाशी, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, काशीपुर, रुड़की एवं टनकपुर कार्यालयों का निर्माण शामिल है। इसके अलावा हल्द्वानी में आईएसबीटी की स्थापना और हल्द्वानी में ही चालक प्रशिक्षण संस्थान बनाने की योजनाएं भी स्वीकृत हुई हैं।
परिवहन मुख्यालय की छह योजनाओं को मंजूरी मिली है। इन्हें विधानसभा सत्र में भी रखा जा चुका है। अधिकतर योजनाएं इसी वर्ष दिसंबर तक पूरी होने की उम्मीद है। इससे राज्य में न केवल वाहन दुर्घटनाओं में भारी कमी आएगी, बल्कि प्रदेश में परिवहन का अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर भी खड़ा होगा।
-बृजेश संत, अपर सचिव परिवहन