देश को बचाएगा सेना का टेलीकॉम नेटवर्क
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बढ़ते साइबर अपराध और सुरक्षा को देखते हुए भारतीय सेना के लिए अलग से दूरसंचार नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है।
इससे सैन्य संस्थानों को सुरक्षित संचार सुविधा मिलेगा। इसके लिए डिफेंस एनएफएस (नेटवर्क फॉर स्पेक्ट्रम) योजना के तहत देश भर में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाई जा रही है।
इसके मद्देनजर उत्तराखंड में भी 1200 किलोमीटर ओएफसी बिछाई जाएगी। अलग नेटवर्क बिछाए जाने के बाद सेना 2 जी और 3 जी स्पेक्ट्रम में अपनी हिस्सेदारी सिविल इस्तेमाल के लिए छोड़ देगी।
अलग नेटवर्क के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग कंपनियां ओएफसी बिछा रही है।
उत्तराखंड सरकार से मांगा है सहयोग
उत्तराखंड के दोनों मंडलों (गढ़वाल और कुमाऊं) में सैन्य संरचनाओं तक ओएफसी बिछाई जाएगी। उत्तराखंड में टीसीआईएल (टेलीकॉम कंसलटेंट इंडिया लिमिटेड) को इसका जिम्मा सौंपा गया है।
ओएफसी बिछाने के लिए बीएसएनएल और टीसीआईएल के अधिकारियों के साथ सूचना प्रौद्योगिकी सचिव दीपक कुमार गैरोला की बैठक हुई। कंपनी अधिकारियों ने इस कार्य में राज्य सरकार से सहयोग मांगा है।
शासन ने दोनों मंडलों के आयुक्तों को सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। यही नहीं नेटवर्क बिछाने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) भी कंपनी को मदद देगा। इसी माह टीसीआईएल अपना सर्वेक्षण शुरू कर रही है।
आम उपभोक्ता के लिए भी फायदेमंद
सेना मौजूदा बीएसएनएल स्पेक्ट्रम से 25 मेगा हर्डज 3जी और 15 मेगा हर्डज 2जी नेटवर्क छोड़ रही है। नेटवर्क स्थापित होने के बाद पांच मेगा हर्डज निगम को और दिया जाएगा।
इससे सिविल इस्तेमाल के लिए स्पेक्ट्रम बढ़ेगा यानी आम उपभोक्ता की मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए निगम के पास अधिक स्पेक्ट्रम उपलब्ध होगा।