गुड न्यूज: 16 हजार शिक्षकों को मिल सकती है राहत, सरकार जल्द लेगी ये बड़ा फैसला
शिक्षा विभाग में कार्यरत करीब 16 हजार शिक्षकों को राहत मिल सकती है। ये वो शिक्षक हैं जिनके विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने मान्यता देने से मना कर दिया है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उत्तराखंड के शिक्षकों के मामले में भी देख रही है कि यूपी की तरह उन्हें कैसे राहत मिल सकती है।
राज्य गठन के बाद प्रदेश में बड़ी संख्या खाली शिक्षकों के पदों को भरने के लिए प्रदेश सरकारों ने समय-समय पर विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण कराए। उत्तरप्रदेश की तर्ज पर प्रदेश में ऐसे विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षितों को शिक्षा विभाग में नियुक्त भी कर लिया गया। लेकिन एनसीटीई ने विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण को मान्यता देने से इनकार कर दिया। इससे प्रदेश के 16 हजार विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षित शिक्षकों में बेचैनी व्याप्त हो गई।
वे गोलबंद हुए और उन्होंने प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन भी छेड़ा। प्रदेश सरकार ने भी उनकी मांग को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के समक्ष कई बार उठाया। इस बीच एनसीटीई का दबाव बढ़ने से सरकार के स्तर पर विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षित शिक्षकों पर दोबारा डीएलएड का दो वर्षीय पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण कराने की प्रक्रिया आरंभ हो गई।
नेशनल ओपन स्कूल से प्रशिक्षण की व्यवस्था भी लागू कर दी गई। लेकिन विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षित शिक्षक डीएलएड का प्रशिक्षण लेने को तैयार नहीं हैं। इस मसले पर गतिरोध बरकरार है। उधर, उत्तरप्रदेश में विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षितों को एनसीटीई से राहत मिलने की खबर है। इसके बाद शिक्षकों का सरकार पर और ज्यादा दबाव बढ़ गया है।
देहरादून दौरे पर आए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के साथ इस मसले पर उनकी वार्ता हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अब उत्तरप्रदेश की तरह उत्तराखंड के मामले में भी राहत का रास्ता तलाशेगी। उनके इस संकेत से विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
मेरी जावड़ेकर जी से बात हुई है। मैंने उनसे अनुरोध किया है कि जिस तरह से विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षितों को यूपी में राहत मिली है, उसी तरह उत्तराखंड के शिक्षकों को भी राहत दी जाए। उन्होंने इस मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
-अरविंद पांडेय, विद्यालयी शिक्षा मंत्री