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बच्चियों में लगा रहे उम्मीदों के 'पंख'

Thu, 05 Sep 2013 11:34 AM IST
अमर उजाला, पंकज गुप्ता, उत्तरकाशी
अमर उजाला, पंकज गुप्ता, उत्तरकाशी Updated Thu, 05 Sep 2013 11:34 AM IST
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teachers day special story

उत्तरकाशी के प्राथमिक विद्यालय जगड़गांव के शिक्षक अपने तरीके से ही बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में जुटे हुए हैं।

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राजेंद्र बधानी गरीब छात्राओं के लिए खुद तो मददगार हैं ही, कई और लोगों को भी उन्होंने इसके लिए प्रेरित किया है। ये लोग न्यूनतम 100 से 500 रुपए मासिक जमा कर निर्धन छात्राओं को शिक्षित करने में जुटे हैं।

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उत्तरकाशी के बड़ीमणी गांव निवासी राजेंद्र बधानी ने 2009 से अपने मिशन का विस्तार किया। अपने साथ कृषि केंद्र चिन्यालीसौड़ के वैज्ञानिक डा. दीपक राणा, डा. बीनिका सिंह, ख्यालीराम, बीईएल कोटद्वार के इंजीनियर दिनेश बधानी, गणपति इंटरप्राइजेज कंपनी देवीदार के मैनेजर विनोद बधानी, शिक्षक आनंद प्रकाश नौटियाल आदि को भी जोड़ा।
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सभी लोग अपने वेतन से हर महीने 100 से 500 रुपए जुटाते हैं। इस राशि से गरीब छात्राओं की फीस, किताब और ड्रेस आदि की व्यवस्था की जाती है। इनमें से डा. दीपक राणा और डा. बीनिका सिंह का लखनऊ तबादला हो गया है फिर भी वे वहां से भी रुपए भेज रहे हैं।

राजेंद्र बधानी अपने साथियों की मदद से अब तक जिले की कई छात्राओं को बारहवीं, बीए, पॉलिटेक्निक करा चुके हैं जबकि कुछ छात्राएं अभी विभिन्न स्कूलों में पढ़ रही है।

दिया सहारा
जगड़गांव की मीरा की मां की वर्ष 2006 में कैंसर से मौत हो गई थी। छह माह बाद पिता भी वाहन दुर्घटना में विकलांग हो गए।

ऐसे में नवोदय विद्यालय पुरोला से 76 प्रतिशत अंक से बारहवीं पास करने वाली मीरा को राजेंद्र बधानी ने अपने साथियों की मदद से इस छात्रा को बीकॉम करा दिया है। छात्रा की तीन वर्षों की फीस के साथ ही किताब और ड्रेस का खर्चा भी उठाया।


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पार्वती के पिता बेरोजगार और मां अपाहिज हैं। शिक्षक इस छात्रा को भी कक्षा नौवीं से पढ़ा रहे हैं। वर्तमान में छात्रा राजकीय महाविद्यालय उत्तरकाशी से बीए कर रही है।

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गवांनाग भंडारस्यू की मोनिका रमोला भी गरीब परिवार से है। शिक्षक ने इस छात्रा को फार्मेसी ट्रेड से पॉलिटेक्निक कराया। दो वर्षीय डिप्लोमा की पूरी फीस के साथ ही ड्रेस और किताबों का खर्च भी दिया।

मैं खुद गरीब परिवार से हूं। ऐसी छात्राएं पढ़ाई पूरी कर सकें इसीलिए उनकी मदद कर रहा हूं। प्रयास रहेगा कि कोई भी बालिका शिक्षा से वंचित न रहे।
- राजेंद्र बधानी, सहायक अध्यापक प्रावि. जगड़गांव

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