Teacher's Day 2019: इस गुरु द्रोण को रहती है एकलव्य की तलाश
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प्राचीनकाल में गुरु द्रोण ने एकलव्य को शिक्षा देने से इनकार कर दिया था। लेकिन आज उसी गुरु द्रोण की धरती पर एक शिक्षक ऐसे भी हैं, जो चुन-चुन कर एकलव्य की तलाश करते हैं। अभावग्रस्त लेकिन होनहार शिष्यों के हुनर को न केवल तराशते हैं बल्कि उन्हें देशभर में पहचान और सम्मान भी दिलाते हैं।
यह शिक्षक हैं राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामपुर कलां में व्यायाम के सहायक अध्यापक रविंद्र सिंह रावत। छात्र-छात्राओं के बीच रवि गुरुजी की नाम से प्रसिद्ध रविंद्र रावत अब तक कई छात्र-छात्राओं को फर्श से उठाकर अर्श पर पहुंचा चुके हैं।
राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी भी की
कुछ वर्ष पहले तक दून में स्कूल गेम्स फेडरेशन की गिनी-चुनी राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होती थी। लेकिन रवि गुरुजी के जुड़ने के बाद हर साल 10 से 12 राज्य स्तर की प्रतियोगिताएं दून में आयोजित की जाती है।
यही नहीं वह दून में राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी भी कर चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में पिछले वर्ष दून के 1040 छात्र-छात्राओं ने विभिन्न राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय
इनमें से 290 छात्र-छात्राओं ने अपने प्रदर्शन के बल पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जगह बनाई, जिनमें से नौ देशभर के खिलाड़ियों के बीच पदक जीतने में भी कामयाब रहे। रविंद्र इससे पहले जिला स्तरीय स्काउट गाइड प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
मूल रूप से थराली, चमोली निवासी रविंद्र रावत सामाजिक और खेल गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। दून में खेलों की ऐसी कोई प्रतियोगिता नहीं, जिसमें उनकी हिस्सेदारी न रहती हो। खेल प्रतियोगिताओं के दौरान घायल खिलाड़ियों की मदद हो या डेंगू पीड़ितों के लिए रक्त जुटाने की मुहिम। रविंद्र हमेशा आगे बढ़कर मदद करते हैं।