उत्तराखंड: डेलीगेट के बजाए शिक्षकों को सीधे मतदान का अधिकार देने की तैयारी
- शिक्षा निदेशालय ने शासन को भेजा प्रस्ताव
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राजकीय शिक्षक संघ की ब्लॉक और जिला कार्यकारिणी की तर्ज पर अब मंडल और प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव में भी शिक्षकों को खुद चुनाव में हिस्सा लेकर वोट देने का अधिकार देने की तैयारी है। शिक्षक संघ की मांग पर शिक्षा निदेशालय ने शासन को इसका प्रस्ताव भेज दिया है। जिसे मंजूरी मिली तो शिक्षक डेलीगेट के बजाए अब सीधे मतदान में भाग लेकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
राजकीय शिक्षक संघ की ब्लॉक और जिला कार्यकारिणी के चुनाव में शिक्षक सीधे अपने मताधिकार का प्रयोग करते रहे हैं, लेकिन मंडल और प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव में डेलीगेट के जरिये मतदान किया जाता है। शिक्षक संघ के प्रांतीय अधिवेशन में शिक्षकों की ओर से यह मांग की गई कि डेलीगेट के बजाए प्रत्येक शिक्षक को खुद अपना वोट देने का अधिकार दिया जाए।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष केके डिमरी के मुताबिक शिक्षा निदेशालय की ओर से शासन को इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है। शासन से इसे मंजूरी मिलने पर संगठन से जुड़ा प्रत्येक शिक्षक चुनाव में सीधे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेगा। संगठन से लगभग 28 हजार से अधिक शिक्षक जुड़े हैं।
दस शिक्षकों पर होता है एक डेलीगेट
राजकीय शिक्षक संघ के मंडल और प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव में 10 शिक्षकों पर एक डेलीगेट होता है। यदि किसी स्कूल में 40 शिक्षक हैं तो सभी शिक्षक मतदान के लिए न जाकर संबंधित स्कूल से मात्र चार शिक्षक मंडल और प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव में हिस्सा लेते हैं।
अप्रैल में हो सकते हैं प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव
राजकीय शिक्षक संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी का दो साल का कार्यकाल होता है। वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल नवंबर 2019 में समाप्त हो चुका है। संगठन की ओर से वर्तमान कार्यकारिणी के कार्यकाल को छह महीने के लिए बढ़ाया गया है। बताया गया है कि इस वर्ष अप्रैल में नई कार्यकारिणी के लिए चुनाव हो सकते हैं।
अनिवार्य तबादले के लिए सीएम से मिलेंगे
राजकीय शिक्षक संघ तीन जिलों के शिक्षकों के अनिवार्य तबादलों के मामले को लेकर इसी सप्ताह मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिलेगा। संघ का कहना है कि यदि इसके बाद भी बात न बनी तो संगठन इस प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। संघ के प्रदेश महामंत्री सोहन माजिला के मुताबिक प्रदेश के दुर्गम और अति दुर्गम स्कूलों में वर्षों की सेवा के बाद तीन जिलों के शिक्षकों के अनिवार्य तबादले के आदेश हुए, लेकिन शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिला।