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स्कूल में शिक्षक ने किया अनूठा प्रयोग, अब निजी स्कूलों को दे रहा टक्कर
दीपक सिंह नेगी, अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Tue, 02 Jan 2018 01:29 PM IST
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शिक्षक
- फोटो : demo
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शिक्षक भाष्कर ने अपने अनूठे प्रयोग से बजेला के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा का ऐसा उजियारा फैलाया कि यहां के बच्चे निजी स्कूलों के छात्रों को टक्कर देने लगे हैं।
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छात्र फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने लगे हैं। यही वजह है कि देखते ही देखते यहां की छात्र संख्या नौ से 21 पहुंच गई है। नए सत्र से इसमें और इजाफा होगा, क्योंकि कई बच्चों के अभिभावकों ने शिक्षक भाष्कर जोशी से संपर्क साधा है। ग्रामीण भी बच्चों को मिल रही बेहतर शिक्षा से खासे प्रसन्न हैं।
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आज के दौर में गरीब से गरीब व्यक्ति भी अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहता है, लेकिन निजी स्कूलों की फीस उसकी आर्थिक पहुंच से बहुत दूर होती है। ऐसे में वह मान मारकर अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजता है, लेकिन वहां पर गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिलने से वह निराश हो जाता है। इन सबके बीच अल्मोड़ा जिले के धौलादेवी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव बजेला में ग्रामीणों की निराशा को दूर करने का बीड़ा उठाया है हल्द्वानी निवासी भाष्कर जोशी ने।
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लगातार यहां की शिक्षा का स्तर हो रहा है बेहतर
जब से वह यहां के प्राथमिक स्कूल में आए तब से लगातार यहां की शिक्षा का स्तर बेहतर हो रहा है। आज जहां छात्र संख्या कम होने के चलते कई प्राइमरी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। वहां यह खबर एक खुशनुमा अहसास कराती है।
स्कूल के बच्चों को अंग्रेजी का बेहतर ज्ञान तो है ही उसके अलावा वह पढ़ाई के साथ ही अन्य गतिविधियों में भी बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं। पढ़ाई में कमजोर बच्चों की भाष्कर स्कूल की छुट्टी के बाद और रविवार को अतिरिक्त कक्षा लेते हैं। अतिरिक्त कक्षा में पढ़ाने के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
बच्चों की हुंकार पर खिसक लेते हैं नशेड़ी
भाष्कर ने बताया कि पहाड़ में नशा बहुत बड़ी समस्या है। आदमी दो सौ रुपये की शराब तो पी लेगा, लेकिन बच्चे को पांच रुपये की पेंसिल नहीं देगा। उन्होंने नशे के खिलाफ छात्रों संग मुहिम छेड़ी है। उन्होंने छात्रों को नशे के खिलाफ एक नारा दिया है। छात्र जब भी किसी को नशा करते देखते हैं तो वहां सावधान की अवस्था में खड़े होकर ‘शिक्षा का हो प्रसार नशे का हो तिरस्कार’ नारा लगाने लगते हैं। इससे नशेड़ी वहां से खिसक जाते हैं।
दीवार पत्रिका, कॉमिक्स से बढ़ रही रचनात्मकता
स्कूल में पढ़ाई के अलावा विद्यालय में दीवार पत्रिका और कॉमिक्स का निर्माण कराकर बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इससे बच्चों को प्रतिभा और अभिरुचियों को पहचान कर, उन्हें नई दिशा में आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि एनजीओ की सहायता से जनवरी में विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षा भी शुरू कराई जा रही है। इसमें बच्चों के साथ कंप्यूटर शिक्षा के लिए छह किलोमीटर पैदल दूर जाने वाले युवाओं को भी लाभ मिलेगा।
मेरे और मेरे छात्रों के पास संसाधनों की कमी है पर जज्बा बहुत है। हमारा सपना है कि यह बच्चे गरीबी और नशे के चंगुल से बच कर एक दिन देश के जिम्मेदार नागरिक बनें। अगर सरकार बच्चों की शिक्षा की ओर और ध्यान दे तो सरकारी स्कूलों में भी बेहतर शिक्षा दी जा सकती है।
- भाष्कर जोशी, अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बजेला