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स्टाइल ही नहीं अहसास भी हैं टैटू

Tue, 27 Jan 2015 01:47 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 27 Jan 2015 01:47 PM IST
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tattoo style.

टैटू गुदवाना अब सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं रह गया है। बिना कहे खुशी और गम के भाव को जाहिर करने का भी जरिया बन गया है। इसके रंग, उभार और बनावट आपके व्यक्तित्व भी दर्शाते हैं।

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दून में टैटू का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। टैटू पार्लर में जाने पर विशेषज्ञ कुछ सवाल करते हैं। इसके बाद उस व्यक्ति की सोच को समझते हुए उसके शरीर के हिस्से पर टैटू गोदा जाता है। इन दिनों कांसेप्ट और फैमिली टैटू का बेहद चलन है। कांसेप्ट टैटू में कोई भी एक सोच होती है।
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यह व्यक्ति में सकारात्मक लाने के लिए बनाए जाते हैं। जबकि फैमिली टैटू अधिकतर ऐसे लोग बनवाते हैं, जो अपने परिवार को हर समय अपने करीब रखना चाहते हैं। उसमें पति-पत्नी भी एक-दूसरे के नाम गुदवाते हैं। कीमतों की बात करें तो टैटू बनवाने में एक हजार से दो लाख रुपए तक का खर्च आ जाता है।
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दर्द सहने के लिए भी बनाते हैं टैटू

लोग खुशी में ही नहीं बल्कि दुख में भी टैटू गुदवाते हैं। टैटू बनाने वालों को न सिर्फ सात दिनों तक दर्द सहना पड़ता है, बल्कि कई तरह की सावधानी भी बरतनी होती है। एक सप्ताह तक सिर्फ सादी दाल-रोटी खानी होती है।

चावल, खट्टी आदि चीजों को छोड़ना होता है। बारिश और धूप से बचना होता है तो वहीं शराब से भी दूर रहना होता है। ऐसा न करने पर टैटू वाली जगह पर इंफेक्शन हो सकता है, वो जगह पक सकती है। इन सबके बावजूद दून में टैटू गुदवाने का क्रेज बढ़ता ही जा रहा है।

शरीर के हिस्से को किया जाता है सुन्न
टैटू गुदवाने के लिए शरीर के उस हिस्से को सुन्न किया जाता है। दर्द से बचाने के लिए विशेषज्ञ ऐसा करते हैं। हालांकि यह क्रीम लगाकर ही किया जाता है। इसके बाद टैटू गोदा जाता है।

21 दिनों में आता है उभार
कुछ टैटू सुई से शरीर में बनाए जाते हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो त्वचा का हिस्सा काटकर बनते हैं। यानी जितने हिस्से में टैटू बनेगा, उतने हिस्से की त्वचा निकाल दी जाएगी। वहां पर रंग भर दिया जाता है। इसके बाद 21 दिनों में उस जगह पर आने वाला उभार खूबसूरत टैटू के रूप में दिखाई देता है।

थ्री-डी और पोर्ट्रेट टैटू भी खास

थ्री डी टैटू भी बेहद खास हैं। यह टैटू पारदर्शी होते हैं। यानी पानी की बूंद की तरह यह कहीं-कहीं पर दिखाई देते हैं। इन्हें थ्री-डी इफेक्ट की तरह बनाया जाता है। इसके अलावा पोर्ट्रेट का भी चलन तेजी से बढ़ रहा है। इनमें बच्चे अपने माता-पिता की तस्वीर अपने हाथों में बनवा रहे हैं।

वहीं भाई-बहन, मामा-भांजी भी एक-दूसरे का पोर्ट्रेट बनवा रहे हैं। यही नहीं टैटू सिर्फ शरीर के किसी हिस्से में ही नहीं बनवाया जाता है। बल्कि इन दिनों लोग हेयर टैटू भी बनवा रहे हैं। इनमें हेयर के बीच में ही डिजाइनिंग की जाती है।

हटाया भी जा सकता है टैटू
टैटू बनवाने के साथ ही इन्हें हटाया भी जा सकता है। अधिकतर ऐसे युवा जो जोश में एक-दूसरे का नाम तो लिख देते हैं, लेकिन जल्द ही यह नाम हटवाने पहुंच जाते हैं।

यही नहीं अधिकतर पुलिस और फौज में भर्ती के लिए युवा भी टैटुओं को हटवाने के लिए पहुंचते हैं। टैटू हटवाने में छह महीने का समय लगता है। इस दौरान भी कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती है।

 
दून में लड़कियों में टैटू बनवाने का खास क्रेज है। टैटू सावधानी पूर्वक साफ-सुथरी सुई से गोदा जाता है। इसमें सावधानी न बरती जाए तो इंफेक्शन भी हो सकती है। यही वजह है कि टैटू बनाते समय ग्राहक को सभी तरह की जानकारी दे दी जाती है। उन्हें उनकी सुई भी साथ में दी जाती है ताकि दिक्कत आने पर बाद में भी उसी सुई का इस्तेमाल किया जा सके।
- विवेक बिस्वास, टैटू एक्सपर्ट डाट स्टूडियो

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