भारत-नेपाल के बीच महाकाली नदी पर झूला पुल बनकर तैयार, रोटी-बेटी के रिश्तों में आएगी मजबूती
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भारत-नेपाल का सीमांकन करने वाली महाकाली नदी में एक और झूला पुल बनकर तैयार हो गया है। पीपली के डौड़ा नामक स्थान पर नेपाल सरकार ने इस पुल का निर्माण करीब एक करोड़ रुपये की लागत से किया है। इस झूला पुल के बनने से भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी के रिश्तों को और अधिक मजबूती मिलेगी।
पिथौरागढ़ जिले में पड़ने वाली भारत-नेपाल की लगभग 180 किमी लंबी सीमा में वर्तमान में छह झूला पुल हैं। इनमें झूलाघाट, जौलजीबी, बलुवाकोट, धारचूला, तवाघाट, सीतापुल शामिल हैं। इन पुलों से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग दोनों देशों के बीच आवाजाही करते हैं।
भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते होने और भारतीय सीमा से सटे नेपाल के गांवों के जरूरी वस्तुओं के लिए भारतीय बाजार पर निर्भर रहने से दिन भर लोगों का आना-जाना बना रहता है। नेपाल के नागरिक बीमारी में उपचार के लिए भी भारत आते हैं।
झूलाघाट और जौलजीबी के बीच सीमांत पर स्थित पीपली कस्बे में काली नदी पर अभी तक कोई झूला पुल नहीं था। पुल नहीं होने से पीपली क्षेत्र के लोगों को 15 से 20 किमी दूर जौलजीबी या झूलाघाट जाना पड़ता था।
इसमें समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। इस समस्या को देखते हुए दोनों देशों की सहमति के बाद पिछले दिनों नेपाल सरकार ने पीपली के डौड़ा में झूला पुल का निर्माण कार्य पूरा कर दिया है।
निर्माण पूरा होने के बाद फिलहाल सुरक्षा के प्रबंध नहीं होने से झूलापुल के गेट बंद किए गए हैं। भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा का जिम्मा एसएसबी के पास है। मिली जानकारी के अनुसार इस झूला पुल में भी एसएसबी जवानों को तैनात करेगी।
छारछुम में बनेगा मोटर पुल
एसएसबी के जवानों की तैनाती होते ही झूला पुल को आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। एसएसबी के एक अधिकारी ने बताया कि सीमा पर नया झूल पुल बनने की सूचना मुख्यालय को दी गई है। प्रशासन और मुख्यालय से निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिले में भारत-नेपाल के बीच पहला मोटर पुल बनाने की कवायद भी शुरू हो गई है। पहला मोटर पुल बलुवाकोट और छारछुम के बीच छारछुम में बनने जा रहा है। 108 मीटर लंबे इस पुल के लिए टेंडर भी हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड अस्कोट इस पुल का निर्माण करेगा। नेपाल प्रशासन से इसकी एनओसी मिल चुकी है। इस पुल के बनने से दोनों देशों के बीच आवागमन सुगम होने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी।