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स्वामी विवेकानंद ने इसी जगह प्राप्त किया था ज्ञान, एक फकीर ने ऐसे बचाई थी उनकी जान, पढ़ें रोचक बातें

Sat, 12 Jan 2019 10:05 AM IST
Priyesh Mishra दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा 
दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा  Published by: Priyesh Mishra Updated Sat, 12 Jan 2019 10:05 AM IST
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Swami Vivekananda jayanti National Youth Day 2019 interesting fact
लाला बद्री साह के मेहमान बनकर इसी घर में रहे थे विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद का अल्मोड़ा से गहरा नाता रहा है। 1890 में नैनीताल से अल्मोड़ा की पैदल यात्रा के दौरान शहर से पहले काकड़ीघाट में पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद लाला बद्री साह के मेहमान बनकर कई दिन ठहरे थे।

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प्रदेश सरकार ने अल्मोड़ा और अन्य स्थानों में स्वामी विवेकानंद से जुड़े स्थलों को विकसित करके पर्यटन सर्किट का रूप देने की घोषणा कई बार की लेकिन आज तक इसका प्रस्ताव तक तैयार नहीं किया जा सका है।   
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अगस्त 1890 की हिमालय यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद और स्वामी अखंडानंद नैनीताल से पैदल अल्मोड़ा की तरफ चले। खैरना से कुछ दूर आगे काकड़ीघाट में पीपल के पेड़ के नीचे स्वामी विवेकानंद तपस्या करने बैठे।

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इसी जगह उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। अपनी अनुभूति उन्होंने साथ चल रहे अखंडानंद को बताई। उसके बाद दोनों पैदल अल्मोड़ा को चल पड़े अल्मोड़ा से कुछ दूर पहले करबला कब्रिस्तान के निकट स्वामी जी भूख और थकान के कारण अचेत हो गए।

पास में रहने वाले एक फकीर ने खीरा (पहाड़ी ककड़ी) खिलायी जिससे स्वामी विवेकानंद चेतना में लौटे। बताते हैं कि अमेरिका के धर्म सम्मेलन से लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद जब दूसरी बार अल्मोड़ा पहुंचे तो उनका अभूतपूर्व स्वागत हुआ।

इस दौरान स्वामी जी उस फकीर को भी पहचान गए, जिसने उनकी जान बचाई थी। स्वामी जी उसके पास गए और उसे दो रुपये भी दिए। अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद दो बार खजांची मोहल्ला में लाला बद्री साह के मेहमान बनकर कुछ दिन रुके।

इस घर को देखने आज भी काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसके अलावा वह छावनी इलाके में स्व. अंबा दत्त के बगीचे में भी गए। प्रदेश सरकार से जुड़े प्रतिनिधि कई बार स्वामी विवेकानंद से जुड़े इन स्थलों को पर्यटन सर्किट के तौर पर विकसित करने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन आज तक इसके लिए प्रस्ताव तक तैयार नहीं किया जा सका है।

बता दें कि हर साल कोलकाता और अन्य राज्यों से स्वामी विवेकानंद के हजारों की संख्या में अनुयायी और अन्य भक्त इन स्थलों को देखने अल्मोड़ा पहुंचते हैं। यदि इन स्थलों को विकसित करके पर्यटन सर्किट का रूप दिया जाए तो पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हो सकता है।   

पर्यटन विभाग फिलहाल स्वामी विवेकानंद के अल्मोड़ा से संबंधित साहित्य को संग्रहित करने की योजना बना रहा है। पर्यटन सर्किट बनाने का कोई प्रस्ताव न तो तैयार किया गया है और न ही ऐसी कोई योजना है।  
राहुल चौबे जिला पर्यटन अधिकारी अल्मोड़ा

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