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स्वामी स्वरूपानंद: मैं हूं शारदा पीठ का असली शंकराचार्य, बाकी सब धोखेबाज

Mon, 08 May 2017 10:07 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरिद्वार Updated Mon, 08 May 2017 10:07 AM IST
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 Swami swarupanand said he is the only shankaracharya
शंकराचार्य - फोटो : gettyimages

शारदा एवं ज्योर्ति पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि शारदा पीठ के वे अकेले शंकराचार्य हैं। उनका अभिषेक द्वारिका में विधिवत हुआ था। अन्य जो संत स्वयं को शंकराचार्य घोषित करते हैं, वे धोखेबाज हैं। हिंदू समाज को ऐसे साधुओं के धोखे में नहीं आना चाहिए।

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20 दिनों के प्रवास पर कनखल स्थित मठ पहुंचे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती रविवार को देर शाम पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्व शंकराचार्य अभिनव तीर्थ महाराज ने उनका अभिषेक द्वारिका में उस चबूतरे पर किया था जो शंकराचार्य पद के लिए अधिकृत है।
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विधान है कि जो इस चबूतरे पर अभिशिक्त होता है, वही शारदा पीठ का शंकराचार्य बनता है। जो अन्य साधु शंकराचार्य होने का नाटक कर रहे हैं, उनसे हिंदू समाज ही नहीं बल्कि शासन को भी दूर रहना चाहिए। ऐसे स्वयंभू संतों का बहिष्कार अखाड़ा परिषद ने किया है। समाज का दायित्व है कि बहिष्कृत साधुओं के कार्यक्रमों में न तो भाग ले और न आमंत्रित करे। 

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अयोध्या में सिर्फ राममंदिर ही बन सकता है

 Swami swarupanand said he is the only shankaracharya

जगतगुरू ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के अलावा और कुछ नहीं बन सकता। दशकों से इस प्रश्न पर वार्ता चल रही है, जिसका कोई परिणाम सामने नहीं आया है। अब सर्वोच्च न्यायालय को फैसला सुना देना चाहिए। दोनों पक्षों की वार्ता से कोई हल निकलने का आसार नहीं है।

राम लला की जन्मभूमि करोड़ों हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है। यहां तो केवल और केवल रामलला के बालरूप का मंदिर ही बनेगा। अयोध्या में कोई मस्जिद न तो थी और न बनाई जा सकती।     
  
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि दक्षिण भारत में आद्य जगतगुरू शंकराचार्य ने जन्म लिया था। उनकी कालड़ी स्थित जन्मस्थली पर उन्हीं के नाम से हवाई अड्डे का नाम किया जाए। ताकि देशभर के श्रद्धालु इस तीर्थ पर पहुंच सके। उनकी स्मृति में केंद्र सरकार एक स्मारक का निर्माण भी कराए।

आद्य शंकराचार्य की समाधि केदारनाथ के पास स्थित है, जो जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गई है। केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर इस समाधि को संरक्षित करे और नए सिरे से जीर्णोद्धार का काम शुरू किया जाए। उत्तराखंड का सौभाग्य है कि भगवान शंकराचार्य ने यहां न केवल लंबा जीवन बीताया बल्कि महासमाधि भी यहीं ली। शंकराचार्य हरिद्वार में पांच दिनों तक रुककर चंडीगढ़ जाएंगे और फिर वापस लौटकर बद्रीनाथ की यात्रा पर रवाना होंगे।

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