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साधु का उद्देश्य धर्म की रक्षा, संतों के आय स्रोत की भी हो जांच: स्वामी शिवानंद सरस्वती

Mon, 29 Apr 2019 02:14 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 29 Apr 2019 02:14 PM IST
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swami shivanand said that Saints income source can also be investigated
स्वामी शिवानंद - फोटो : फाइल फोटो

हरिद्वार स्थित मातृ सदन के परम अध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि साधु का उद्देश्य धर्म की रक्षा करना होता है, लेकिन यहां अखाड़ों की संपत्ति पर अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतें बनाई गई हैं। उन्होंने संतों की निजी संपत्ति की जांच कराने और कमाई के स्रोतों की जांच कराने की मांग की।

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स्वामी शिवानंद सरस्वती सोमवार को मातृ सदन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार के संत सरकार से कुंभ के लिए भूमि की मांग कर रहे हैं, लेकिन जो भूमि अखाड़ों के पास पहले थी। उनमें अवैध रूप से निर्माण कर लिया गया है। बहुमंजिला भवनों को बनाकर बेच दिया गया है। यदि अब भी उन्हें भूमि दी जाती है तो उस पर भी वे कब्जा कर लेंगे। उन्होंने कहा कि धर्म की लड़ाई धर्म से लड़ी जाती है अधर्म से नहीं।
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पैसों की जरूरत संस्थाओं को होती है साधु-संतों को नहीं। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में अखाड़ों के साधु संतों की निजी संपत्ति की जांच कराई जानी चाहिए। यदि किसी संत के नाम पर संपत्ति या धन है तो उसके आय के स्रोत की जांच करानी चाहिए। यदि आयकर के दायरे में आते हैं तो उनसे टैक्स भी वसूला जाना चाहिए। क्योंकि देश का हर नागरिक एक समान है। संत प्रयागराज की भांति हरिद्वार कुंभ काफी भव्य कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन भव्यता चकाचौंध से नहीं आध्यात्मिक आधार पर होती है। कुंभ का भव्यता से कोई लेना देना नहीं है।
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उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि कुंभ के दौरान गंगा के पानी को क्लोरीन से साफ रखा गया। जिससे मछलियां भी मर गईं। प्रयागराज में यही हुआ था और एनजीटी ने भी इसका प्रमाण दिया है। उन्होंने कहा कि संत गोपाल दास को इसका पता चल गया था। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपाई को एक साक्षात्कार दिया है। जिसमें उन्होंने शासन प्रशासन द्वारा उन पर किए गए उत्पीड़न को बयां किया है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि गोपालदास इस समय किस स्थान पर हैं। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जिलाधिकारी को कई बार एनएमसीजी ने खनन और स्टोन क्रशर पर रोक लगाने का आदेश दिया था, लेकिन बार बार कहने पर भी उन्होंने आदेशों का अनुपालन नहीं किया।


19 अप्रैल को मातृ सदन में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। उसकी कॉपी एनएमसीजी को भी भेजी थी। 26 अप्रैल को एनएमसीजी ने एक और आदेश जारी कर जिलाधिकारी को 1 अप्रैल तक आदेशों का सख्ती से अनुपालन कराते हुए खनन और स्टोन क्रशर पर रोक लगाने के लिए कहा है। एनएमसीजी ने यह भी कहा है कि यदि 1 अप्रैल तक स्टोन क्रशर और खनन पर रोक नहीं लगाई जाती है तो जिला अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन 187 दिन भी जारी रहा।

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