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...फिर अधूरी रह गई स्वामी सानंद की अंतिम इच्छा, संतों को नहीं मिला पार्थिव शरीर का इंतजार

Fri, 26 Oct 2018 05:50 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 26 Oct 2018 05:50 PM IST
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Swami sanand dying wish for Ganga snan now complete after High court order
स्वामी सानंद - फोटो : file photo

गंगा के लिए अपने प्राण त्यागने वाले स्वामी सानंद की अंतिम इच्छा 16 दिन बाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पूरी नहीं हुई। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि अनशन के दौरान स्वामी सानंद की अंतिम इच्छा मरणोपरांत उनके शरीर को गंगा जल से स्नान कराने की थी, लेकिन एम्स की ओर से पार्थिव शरीर न दिए जाने के कारण स्वामी सानंद की अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि पार्थिव शहरी हरिद्वार आने के बाद सर्वप्रथम विधि विधान के साथ उनके पार्थिव शरीर को गंगा स्नान करा कर उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया जाएगा।  

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गंगा रक्षा के लिए अनशन करते हुए देह त्याग ने वाले स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को मातृसदन लाने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद गंगा भक्तों की नजर दिनभर एम्स की तरफ लगी रही। शाम तक भी सानंद का शरीर मातृसदन नहीं पहुंचा था। 
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल 22 जून को मातृसदन में अनशन पर बैठे थे। 112वें दिन 11 अक्तूबर को ऋषिकेश स्थित एम्स में उनका देहावसान हो गया था।
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देर शाम तक भीनहीं पहुंचा पार्थिव शरीर

मातृसदन ने इसी दिन एम्स के निदेशक को पत्र लिखकर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए और स्वामी सानंद के शरीर को कुछ समय के लिए देने का आग्रह किया था, लेकिन एम्स ने पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। मातृसदन के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने स्वामी सानंद का शरीर लेने के लिए 22 अक्तूबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने आठ घंटे के भीतर स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को मातृसदन में लाने का आदेश दिया।

शुक्रवार को दिनभर मातृसदन और गंगा भक्तों की नजरें ऋषिकेश एम्स की तरफ लगी रही, लेकिन उनके पार्थिव शरीर को देरशाम तक भी नहीं लाया गया। ऋषिकेश कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रितेश शाह ने बताया कि इस संबंध में अभी कोई आदेश नहीं मिले हैं।

हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि शरीर लाने के बारे में वह अभी किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन हाईकोर्ट का आदेश स्वागत योग्य है। अब स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को मातृसदन लाने का काम प्रशासन का है।    

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