शंकराचार्य के पद पर आसीन हुए स्वामी अच्युतानंद, स्वरूपानंद ने एफआईआर कराई
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद की सारी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए शुक्रवार को भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद सरस्वती का शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर पट्टाभिषेक समारोह संपन्न हो गया।
अद्भुत मंदिर में आयोजित समारोह के मंच से कहा गया कि अच्युतानंद सरस्वती अब शारदा पीठ के शंकराचार्य और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती पूर्व शंकराचार्य हो गए हैं। जवाब में चेतावनी के अनुरूप जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज के प्रतिनिधि और द्वारिका पीठ के सचिव स्वामी सदानंद सरस्वती ने शुक्रवार को ही स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के खिलाफ गुजरात के द्वारिका थाने में एफआईआर दर्ज करा दी।
अखाड़ा परिषद ने इस आयोजन के बहिष्कार की अपील की थी, जिसका असर यह रहा कि स्थानीय संत और अखाड़े इस समारोह से दूर ही रहे। हरिपुर स्थित अद्भुत मंदिर परिसर में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को आसन पर बैठाकर विद्वानों ने वैदिक मंत्रों को सस्वर पाठ किया। विभिन्न वाद्य यंत्रों की ध्वनि के बीच उन्हें शारदा पीठाधीश्वर घोषित किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए काशी सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि वर्ष 1982 से स्वरूपानंद सरस्वती शारदा पीठ की परंपरा तोड़ते आ रहे हैं। वह खुद परंपरा तोड़कर शंकराचार्य के पद पर आसीन हुए थे। उसके बाद भी वह हरिद्वार में अपने कार्यक्रमों में कुरआन की आयतों से अपने कार्यक्रमों का शुभारंभ कराकर मर्यादाएं तोड़ते रहे।
उन्हें हटाकर विद्वत परिषद ने स्वामी अच्युतानंद जैसे विद्वान को अब शारदा पीठ पर आसीन कर दिया है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद को शास्त्रों का ज्ञान नहीं है। शेष तीनों पीठों पर भी अगले कुछ वर्षों में नए शंकराचार्यों की घोषणा की जाएगी। धर्म और शास्त्र की रक्षा के लिए संत समाज लगातार काम करता रहेगा। उन्होंने कहा कि आबादी की आवश्यकता के अनुरूप चार नहीं बल्कि 32 शंकराचार्य बनाए जा सकते हैं। राष्ट्र के विकास कार्यों से संतों को कोई नहीं रोक सकता।
विवेकानंद सरस्वती ने कहा कि स्वरूपानंद ने महापाप किए हैं
समारोह में स्वामी निगमबोध तीर्थ ने कहा कि नियमानुसार अच्युतानंद को शारदा पीठाधीश्वर पद पर आसीन किया गया है। जो लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं, वे धर्म का मर्म नहीं जानते।
आयोजन के संयोजक तंत्र विशारद स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने कहा कि इस समय चारों ओर अंधकार फैला हुआ है। संतों ने धर्माचरण छोड़ दिया है। स्वरूपानंद सरस्वती ने रामालय ट्रस्ट खड़ाकर मंदिर नहीं बनने दिया। रामलला आज भी तंबू में विराजमान हैं। सोई वैदिक संस्कृति को जगाने का कार्य अब अच्युतानंद करेंगे।
विवेकानंद सरस्वती ने कहा कि स्वरूपानंद ने महापाप किए हैं। उन्होंने तो इस पद को ही न्यायालय में घसीट दिया। स्वरूपानंद का पक्ष यदि अखाड़े लेते हैं तो शर्म की बात है। स्वरूपानंद का समय समाप्त हो गया है, अब अच्युतानंद द्वारिका जाकर पीठासीन होंगे। समारोह को काशी पंडित सभा के उपाध्यक्ष प्रो. हरि प्रसाद अधिकारी, कैलाशानंद, प्रपन्नाचार्य, आजनेय शास्त्री आदि ने भी संबोधित किया। पंडित सतीश चंद्र मिश्रा के निर्देशन में गणेश शास्त्री आदि पंडितों ने नव शंकराचार्य को पीठ की ओर से अभिनंदित किया।
अच्युतानंद ने द्वारिका पीठ पर जबरन कब्जे का प्रयास किया है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठामनाय सेतु एवं महानुशासन संविधान के अनुसार एक शंकराचार्य के जीवनकाल में एक पीठ पर अन्य की नियुक्ति नहीं हो सकती।
- स्वामी सदानंद सरस्वती, सचिव द्वारिका पीठ
धार्मिक परंपराओं के पालन के लिए तत्पर रहूंगा : अच्युतानंद
शारदा पीठ पर आसीन हुए शंकराचार्य स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि उन पर गुरुतर भार आ गया है। वे आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सभी परंपराओं का पालन करेंगे और शंकराचार्य की मर्यादा में रहेंगे। धार्मिक कार्यों का समूचे क्षेत्र में विस्तार किया जाएगा। सेवा प्रकल्पों के माध्यम से देशभर में कार्यों की शुरूआत की जाएगी। धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए वे सत्त कार्य करते रहेंगे।
स्वरूपानंद सरस्वती ने आयोजन को अमान्य घोषित किया
शारदा पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अच्युतानंद के आयोजन को अमान्य घोषित कर दिया है। दूरभाष पर उन्होंने ने कहा कि इस पद पर कोई भी तब तक आसीन नहीं हो सकता, जब तक मैं स्वयं न चाहूं। उचित समय आने पर वह अपने शिष्य को पीठों पर बैठाएंगे। जिन्होंने धर्म विरुद्ध आचरण किया है उनका धर्म जगत बहिष्कार करेगा।