स्वच्छता सर्वेक्षण 2019: देश का सबसे साफ गंगा टाउन बना उत्तराखंड का ये कस्बा, 6 शहर भी शामिल
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स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए स्वच्छ शहरों के नाम की घोषणा आज की गई। सर्वे में उत्तराखंड का गौचर सबसे साफ गंगा टाउन बना है। गौचर उत्तराखंड के चमोली जिले की कर्णप्रयाग तहसील में स्थित एक छोटा सा कस्बा है। वहीं स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 (ग्रामीण) में उत्तर भारत के अंतर्गत रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि को स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है।
नई दिल्ली में नगर पंचायत अध्यक्ष अरुणा बेंजवाल ने बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पुरस्कार प्राप्त किया है। उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद यह पहला मौका है, जब जनपद रुद्रप्रयाग के किसी शहर को स्वच्छता के मामले में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है।
बता दें कि भारत में कुल 425 शहर राष्ट्रीय रैंकिंग हिस्सा रहे। ये एक लाख से अधिक आबादी वाले शहर हैं। उत्तराखंड के ये शहर रैंकिंग स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में शामिल हुए।
1. रुड़की रैंक 281
5000 में से मार्क 1909
2 काशीपुर रैंक 308
5000 में से 1736
3. हल्द्वानी रैंक 350
5000 में से 1525
4. हरिद्वार रैंक 376
5000 में से 1381 है
5. देहरादून रैंक 384
5000 में से 1343
6. रुद्रपुर रैंक 403
5000 में से 1208
टॉप पुरस्कार
स्वच्छता सर्वे में इंदौर लगातार तीसरी बार अव्वल आया है। सबसे स्वच्छ राजधानी में भोपाल पहले स्थान पर है। स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 में 4237 शहरों का सर्वेक्षण 28 दिनों में किया गया। इस दौरान 64 लाख लोगों का फीडबैक लिया। सोशल मीडिया पर इन शहरों के 4 करोड़ लोगों से फीडबैक लिया गया।
कैटेगरी - शहर
सबसे स्वच्छ गंगा टाउन - गौचर, उत्तराखंड
सबसे स्वच्छ शहर - इंदौर
सबसे स्वच्छ बड़ा शहर - अहमदाबाद (10 लाख से ज्यादा आबादी वाला)
सबसे स्वच्छ मध्यम आबादी वाला शहर - उज्जैन (3 -10 लाख की आबादी)
सबसे स्वच्छ छोटा शहर - एनडीएमसी दिल्ली (3 लाख से कम आबादी)
सबसे स्वच्छ राजधानी - भोपाल
सबसे स्वच्छ कैंटोनमेंट - दिल्ली कैंट
सात पहाड़ों से घिरा हुआ है गौचर
गौचर सात पहाड़ों से घिरा हुआ है। यह कस्बा प्रसिद्ध गौचर मेले के लिए जाना जाता है। इस मेले में देसी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। अलकनंदा नदी के किनारे बसा गौचर बद्रीनाथ धाम का पड़ाव है।
1920 में तत्कालीन वायसराय की पत्नी लेडी विलिंगडन हवाई मार्ग से आई थी। 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ उनकी बहन विजया लक्ष्मी पंडित बद्रीनाथ की यात्रा के लिए हवाई मार्ग से यहां पहुंचे थे।