शासन के इस फरमान से मौज में 'काम चोर' शिक्षक

बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 23 Nov 2013 08:51 AM IST
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दुर्गम स्कूलों से मुंह फेरने वाले शिक्षकों को सस्पेंड कर उत्तराखंड शासन ने अपने लिए ही मुसीबत खड़ी कर ली है। दरअसल, ऊंची पहुंच और जुगाड़ के भरोसे निलंबित शिक्षकों पर इस कार्रवाई का कोई असर नजर नहीं आ रहा है।
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शिक्षा व्यवस्था बदहाल
निलंबन अवधि में बिना काम किए भी उन्हें जीवन निर्वहन और अन्य भत्ते मिलने हैं। बहाली होने पर उन्हें पूरा बकाया भुगतान किया जाएगा। दूसरी ओर, निलंबन अवधि जितनी लंबी खिंचेगी, प्रदेशभर में शिक्षा व्यवस्था उतनी बदहाल होती जाएगी।
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दो-चार शिक्षकों का मामला होता तो शायद उन्हें लंबे समय तक घर बिठाए रखा जा सकता था, लेकिन 108 शिक्षकों को एक साथ निलंबित किए रखना शासन के लिए भी संभव नहीं होगा।

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यही वजह है कि जोश में निलंबन की कार्रवाई करने वाले शासन को अब इसका स्याह पहलू नजर आते ही होश आने लगा है। यही वजह है कि नई तैनाती पर ज्वाइन करने वाले शिक्षकों को तुरंत बहाल किया जा रहा है। ऐसा न हुआ तो पहले ही दैवी आपदा से क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों और मध्य सत्र में तबादले की मार झेल रहे बच्चों का भविष्य चौपट हो जाएगा।

खूब चल रहा साइड बिजनेस
जानकारी के मुताबिक कई शिक्षक स्कूलों में अध्यापन के अलावा एलआईसी, एमवे जैसे बिजनेस प्लान और प्रॉपर्टी डीलिंग जैसे धंधों से जुड़े हुए हैं। पहले ये लोग स्कूल से वक्त निकालकर यह काम करते थे, लेकिन निलंबित होने के बाद उन्हें अपने साइड बिजनेस में पूरा समय मिल रहा है।

दून में निलंबित बेसिक शिक्षक
निर्मला असवाल, ऊषा सिंह, किरन रावत, मंजू सती, संगीता उनियाल, दीपा बमराड़ा, कमला डबराल, दिनेश्वरी नेगी, ममता जोशी, मालती रावत, कल्पना डोभाल, गीता थपलियाल, सत्यप्रकाश, गजेंद्र डोभाल, देवकीनंदन, मदनमोहन जोशी, शीषेपाल कृषाली, प्रदीप तोमर।

निलंबित माध्यमिक शिक्षक
रश्मि बौंठियाल, मोहम्मद अख्तर खान, अरुणा सिंह, ऊषा मेहरा, दिनेश रावत।

अटैच होंगे निलंबित शिक्षक
विभागीय जानकारी के मुताबिक निलंबित शिक्षकों को उनके वर्तमान क्षेत्र के ही खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में अटैच किया जा रहा है। ये शिक्षक हर रोज कार्यालय में जाकर हाजिरी तो लगाएंगे, लेकिन उनसे कोई काम नहीं लिया जाएगा। उपस्थिति दर्ज कराने के बाद शिक्षक दिनभर कार्यालय में रहें या न रहें, यह उनकी इच्छा होगी।

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