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...तो मिड सीजन में हटेंगे सरप्लस 'गुरूजी'
देहरादून/बिशन सिंह बोरा
Updated Sat, 17 Aug 2013 09:24 AM IST
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शिक्षा सत्र (अप्रैल से) शुरू होने के पांच माह बाद अचानक विभाग को प्रदेश के स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों की याद आ गई है। ऐसे 2600 शिक्षकों की सूची तैयार कर ली गई है।
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बिना नीति, नियमावली के जल्द ही इन शिक्षकों को सितंबर में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। दूसरी ओर विभाग के इस फैसले पर सवालिया निशान भी लगने लगे हैं।
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पटरी से उतरेगी शिक्षण व्यवस्था
विभाग यह कदम तो उठाने जा रहा है, लेकिन मध्य सत्र में लिए जा रहे इस निर्णय से स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पटरी से उतरने की आशंका बन गई है। दूसरी ओर, स्थानांतरण प्रक्रिया में भी अनियमितता और मनमानी बढ़ने की आशंका है।
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ये हैं सरप्लस शिक्षक
जानकारी के मुताबिक छात्रों और शिक्षकों का अनुपात 40:1 होना चाहिए। प्रदेश के कई स्कूलों में पहले छात्रसंख्या काफी अधिक थी। एक-एक कक्षा के कई सेक्शन होने के कारण उसी हिसाब से शिक्षक तैनात किए गए थे। वक्त के साथ छात्र घटते गए, लेकिन शिक्षक वही बने रहे। अब ये शिक्षक सरप्लस हो गए हैं।
नए हटेंगे या पुराने पता नहीं
विभाग छात्र-शिक्षक अनुपातीकरण के नाम पर स्थानांतरण की तैयारी तो कर रहा है, लेकिन हटने वाले शिक्षक नई तैनाती पाने वाले होंगे या पहले से तैनात शिक्षक यह अब तक साफ नहीं है। सवाल यह भी है कि अगर किसी स्कूल से शिक्षक हटाने के बाद फिर बच्चों की संख्या बढ़ जाए तो क्या शिक्षकों को फिर वहां भेजा जाएगा।
पहले ही स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित
आपदा के चलते पहले ही स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित है। अब सितंबर में शिक्षकों के तबादले हुए तो इसका भी बुरा असर दिखेगा। माना जा रहा है कि विभाग के इस निर्णय पर शिक्षक कड़ा एतराज जताएंगे। शिक्षकों ने आंदोलन किया तो जाहिर तौर पर स्कूल बंद होंगे।
शिक्षक भेजे तब क्यों नहीं दिया ध्यान
शिक्षा विभाग में हाल ही में कुछ तबादले और प्रमोशन के बाद शिक्षकों को नए स्कूलों में तैनाती दी गई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर विभाग ने उस वक्त क्यों स्कूलों में शिक्षकों के सरप्लस का ध्यान नहीं रखा।
पूर्व में 418 शिक्षकों के तबादलों में हुई मनमानी
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में भी 418 शिक्षकों के तबादलों में जमकर मनमानी हुई थी। तब हर शिक्षक से एक लाख रुपये लिए जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद तबादलों को निरस्त किया गया। हालांकि, तब तक कई शिक्षक नए स्कूलों में तैनाती ले चुके थे और वे अब भी वहीं जमे हैं।
इनकी भी सुनिए
प्रदेश में 2600 शिक्षक सरप्लस हैं। स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने से यह स्थिति बनी है। इन शिक्षकों की सूची तैयार की जा चुकी है। जल्द ही इन शिक्षकों को तैनाती दी जाएगी।
-चंद्र सिंह ग्वाल, शिक्षा निदेशक
किसी शिक्षक को हटाना है तो इसके लिए शिक्षा नियमावली में प्रावधान किया जाना चाहिए था। बगैर नीति और नियमावली के शिक्षकों को हटाया गया, तो इसमें जमकर मनमानी होगी।
-अजय राजपूत, प्रांतीय प्रवक्ता, राजकीय शिक्षक संघ