सरकार बताए, टिहरी प्रभावितों को कहां मिले जमीन?

अमर उजाला, नई टिहरी Updated Fri, 24 Jan 2014 08:38 PM IST
supreme court take action against uttarakhand government
सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को टिहरी बांध से प्रभावित 414 परिवारों को भूखंड आवंटन की प्रगति रिपोर्ट तीन सप्ताह के अंतर्गत न्यायालय में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

शपथपत्र सहित रिपोर्ट दें
न्यायालय ने कहा है कि प्रभावित परिवारों की नाम सहित पूरी लिस्ट तथा भूमि का ब्योरा भी उपलब्ध कराया जाए कि किस स्थान पर कितनी भूमि आवंटित की जानी है शपथपत्र सहित रिपोर्ट देने को कहा है।

इस मामले की अगली सुनवाई अब 4 मार्च को होगी। सरकार जो हलफनामा देगी उसके दो सप्ताह के अंतर्गत याचिकाकर्ताओं को विस्थापितों का पक्ष रखना है।

टिहरी बांध प्रभावितों और विस्थापितों की समस्याओं को लेकर पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय, जोत सिंह बिष्ट, दर्शनी रावत व महिपाल नेगी की ओर से 2005 में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी।

याचिका में बांध प्रभावित गांवों में आवागमन के लिए पुलों का निर्माण न होने, पेयजल योजनाओं का निर्माण, ग्रामीण व्यापारियों का प्रतिकर, आंशिक डूब क्षेत्र के ग्रामों का पुनर्वास सहित अन्य समस्याओं का निराकरण न होने की बात कही गई थी।

21 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस एचएल गोखले, जस्टिस कुरियन जोसेफ की बेंच में मामले की सुनवाई हुई। बांध प्रभावितों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गुंजालविश, संजय पारिख, शांति प्रसाद भट्ट, रीना, अनिता सिनोई, वीरेंद्र रावत ने प्रभावितों के पक्ष पर बहस की।

एनओसी के लिए भेजा गया
राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता रचना श्रीवास्तव कहा कि 414 परिवारों का विस्थापन किया जाना है। जिनके लिए हरिद्वार जिले के खानपुर में भूमि का चयन किया गया है। जिसका प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार के पर्यावरण व वन मंत्रालय को एनओसी के लिए भेजा गया है।

टीएचडीसी की ओर से अधिवक्ता एचपी रावल, बीनू टम्टा ने कहा कि उन्हें भारत सरकार की ओर से खानपुर भूमि की अनापत्ति मिलने का इंतजार है।

भूमि का आवंटन होना शेष
इस पूरे प्रकरण को लंबे समय से देख रहे याचिकाकर्त्ता और अधिवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने बताया कि 414 परिवार तो वह है जिनको को पूर्व में पात्र विस्थापित माना जा चुका है। भूमि का आवंटन होना शेष है।

जबकि वर्तमान में बांध प्रभावित परिवारों की संख्या 2073 तक पहुंच चुकी है। लेकिन अभी तक इनके समुचित पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की जा  रही है।

न्यायालय ने सरकार को तीन सप्ताह के अंतर्गत ऐसे परिवारों का विस्थापन करने का समय दिया है। न्यायालय में अंतरिम सुनवाई अब 4 मार्च को होनी है।

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