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मुख्तयार हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई मुहर, आरोपियों को उम्रकैद की सजा

Mon, 17 Dec 2018 10:22 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, काशीपुर
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, काशीपुर Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 17 Dec 2018 10:22 PM IST
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Supreme court stay on lifetime imprisonment For Mukhtar murder case two murderers 
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जसपुर के पूर्व पालिकाध्यक्ष हाजी मुख्तयार अहमद हत्याकांड में जसपुर की पूर्व पालिकाध्यक्ष फरीदा बेगम और सह आरोपी मोहम्मद अशरफ को उत्तराखंड हाईकोर्ट और एडीजे कोर्ट से मिली आजीवन कारावास की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।

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कोर्ट ने मुख्तयार हत्याकांड में चार अन्य को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। 72 वर्षीय फरीदा बेगम को 18 दिसंबर तक काशीपुर कोर्ट में आत्मसमर्पण करना है। अत : वह मंगलवार को सरेंडर कर सकती हैं। फरीदा बेगम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अभी जमानत पर हैं। अदालत ने चार दिसंबर 2018 को फैसला सुनाया था।      
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जसपुर निवासी और 1988 में नगर पालिकाध्यक्ष रहे हाजी मुख्तयार अहमद की एक जुलाई 1999 को रात करीब साढ़े आठ बजे रफीक अहमद (दिलदार) के घर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 

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शाहिद हुसैन ने जसपुर कोतवाली में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष फरीदा बेगम, मोहम्मद अशरफ, रईस अहमद उर्फ सतना, रईस उर्फ लपट्टी, असलम, नसीम उर्फ चुरती, इदरीश उर्फ मिर्ची के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

इस मामले की मुख्य अभियुक्त तत्कालीन पालिकाध्यक्ष फरीदा बेगम सहित अन्य कुछ आरोपियों को पहले एडीजे कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। 

2013 में अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अपील (याचिका संख्या 1560/2013) दायर की। कोर्ट ने कहा है कि फरीदा बेगम जमानत पर है, अत: आदेश के दो सप्ताह के भीतर वह संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण करें। मोहम्मद अशरफ जेल में है।  इस याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बैंच न्यायमूर्ति एमआर शाह, न्यायमूर्ति एन वी रामाना व न्यायमूर्ति मोहन एम. संतनागोदर ने की।

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