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Uttarakhand News: विधानसभा भर्ती प्रकरण...बर्खास्त कर्मचारियों को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

Fri, 19 May 2023 04:07 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 19 May 2023 04:07 PM IST
सार

विधानसभा सचिवालय में 396 पदों पर बैक डोर नियुक्तियां 2001 से 2015 के बीच हुई है जिनको नियमित किया जा चुका है। याचिकाओं में कहा गया था कि 2014 तक तदर्थ नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई लेकिन उन्हें छह वर्ष के बाद भी नियमित नहीं किया और अब उन्हें हटा दिया गया।

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Supreme Court rejected petition of  assembly employees upheld the decision of Speaker Uttarakhand news
रितु खंडूरी भूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारियों को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों की विशेष अनुग्रह याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर 2016 से 2021 तक तदर्थ आधार पर नियम विरुद्ध नियुक्तियों को रद्द कर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था।

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विधानसभा सचिवालय में बैकडोर भर्तियां विवादों के घेरे में आने पर विस अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने नियुक्तियों की जांच के लिए तीन सितंबर 2022 को पूर्व आईएएस डीके कोटिया की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने 22 सितंबर को अपनी जांच रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी थी। इसमें समिति ने तदर्थ आधार पर की गई नियुक्तियों को नियम विरुद्ध पाया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर स्पीकर ने 23 सितंबर को 2016 के बाद हुई नियुक्ति को रद्द कर 228 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी थी।
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निर्णय के विरुद्ध कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने भी विधानसभा कर्मचारियों को बर्खास्त करने के विधानसभा सचिवालय के आदेश को सही ठहराया। इस पर बर्खास्त कर्मचारियों ने सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दायर की। शुक्रवार को सुप्रीमकोर्ट ने डेढ़ मिनट की सुनवाई में इस याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीमकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के फैसले को सही ठहराया है।
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विधानसभा सचिवालय की ओर से पैरवी कर रहे वकील अमित तिवारी ने बताया की वर्ष 2021 में विधानसभा में तदर्थ रूप से नियुक्त 72 कर्मचारियों द्वारा दाखिल की गई याचिका (एसएलपी) पर सुप्रीमकोर्ट की डबल बेंच के न्यायधीश हृषिकेश रॉय और न्यायधीश मनोज मिश्रा ने सुनवाई की।

विधानसभा सचिवालय में आयोगों के माध्यम से होगी खाली पदों पर भर्ती
भविष्य में विधानसभा सचिवालय में होने वाली नियुक्तियों में नियम का अनुपालन और पारदर्शिता हो इसके लिए स्पीकर ने नियमावली में संशोधन की पहल है। उत्तराखंड विधानसभा अब सीधी भर्ती के सभी खाली पदों को उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से भरेगी। इस संशोधन के साथ शासन ने सेवा नियमावली पर सहमति जताते हुए इसे विधानसभा को लौटा दिया है। संशोधित नियमावली में विधायी को फिर से विधानसभा का प्रशासकीय विभाग बनाने का प्रावधान किया है।

नियुक्तियों में नहीं दिया गया समानता का अवसर
समिति ने जांच रिपोर्ट में तदर्थ आधार की गई नियुक्तियों को नियम विरुद्ध माना था। विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती के लिए निर्धारित चयन समिति का गठन नहीं किया गया। तदर्थ नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी नहीं की गई। अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र नहीं मांगे गए, केवल व्यक्तिगत आवेदन पत्रों पर नियुक्ति प्रदान कर दी गई। इसके लिए प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित नहीं की गईं। नियुक्तियों में अभ्यर्थियों को समानता का अवसर नहीं दिया गया, जो संविधान के अनुच्छेद-14 प अनुच्छेद-16 का उल्लंघन है।

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मैं सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की सराहना व स्वागत करती हूं। विधानसभा सचिवालय से कुछ बर्खास्त कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज कर दी है। -ऋतु खंडूड़ी भूषण, विधानसभा अध्यक्ष

विधानसभा सचिवालय में 396 पदों पर बैक डोर नियुक्तियां 2001 से 2015 के बीच हुई है जिनको नियमित किया जा चुका है। याचिकाओं में कहा गया था कि 2014 तक तदर्थ नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई लेकिन उन्हें छह वर्ष के बाद भी नियमित नहीं किया और अब उन्हें हटा दिया गया।
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