शादी के बाद उठाई बंदूक और लगाया 'अचूक' निशाना
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अलका सिंह और पूर्णिमा भंडारी के नाम किसी भी ऐसी शादीशुदा महिला के लिए प्रेरणा हो सकते हैं, जो शादी से पहले अपने ख्वाब पूरे नहीं कर सकीं और शादी के बाद जिम्मेदारियों का रोना रोती रहीं।
इन दोनों महिलाओं ने शूटिंग में जागी रुचि को मुकाम तक पहुंचाया। हाल ही में खत्म हुई उत्तरांचल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में दोनों ने दो-दो मेडल पर निशाना साधा। साथ ही प्री नेशनल के लिए भी क्वालिफाई कर लिया।
अलका सिंह ने दो कांस्य, जबकि पूर्णिमा ने एक रजत और एक कांस्य पदक हासिल किया। खास बात यह है कि यह उपलब्धि इन्होंने महज ढाई महीने की दिन-रात की मेहनत से हासिल की।
अब वह दिल्ली में एक माह बाद होने वाली प्री-नेशनल के लिए प्रैक्टिस में जुटी हैं। कोच मयंक मारवाह इनके जज्बे से बेहद खुश हैं। उनकी मानें तो दोनों राष्ट्रीय फलक पर छाने की कूवत रखती हैं।
बच्चे को सिखाने ले गई थी, खुद उठाई गन
अलका सिंह ने बताया के वो कक्षा एक में पढ़ने वाले अपने बच्चे को शूटिंग सिखाने के लिए दून इंस्टीट्यूट आफ शूटिंग एंड स्पोर्ट्स में ले गई थी।
यहां कोच ने गन पकड़ने का तरीका देखा तो कहा-आप खुद क्यों नहीं शूटिंग करतीं। पहले तो वह लगा वह मजाक कर रहे हैं, लेकिन वह गंभीर थे।
मैं तो पहले ही बास्केटबाल खिलाड़ी रह चुकी थी। परिजनों को इस बाबत बताया तो सोच-विचार के बाद उन्होंने भी हामी भरी दी। नतीजा सामने है।
आते-जाते देखती थी बोर्ड, बड़ा मन करता था
शादी को 10 साल हो गए। मैं तेगबहादुर रोड से गुजरते अक्सर शूटिंग इंस्टीट्यूट का बोर्ड और बच्चों को शूटिंग करते देखती थी तो बड़ा मन करता था कि मैं भी शूटिंग करूं। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां आंखों के आगे आ जाती। लेकिन एक दिन खुद को रोक नहीं पाई। गेट के भीतर जा कोच से सीधे बात की। वह भी सहर्ष सिखाने को तैयार हो गए। घरवालों को कन्वींस किया और गन उठा ली। अब मेडल पा मन झूम रहा है।
-पूर्णिमा भंडारी, महिला शूटर