इस स्कूल में अब बच्चे सीखेंगे बजरंगबली के मैनेजमेंट गुण
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ज्ञान और गुण के सागर हनुमान जी के मैनेजमेंट गुणों की सीख छात्रों को स्कूली शिक्षा के साथ अलग से दी जाएगी। इसके लिए सरस्वती शिशु मंदिर ने नए शिक्षा सत्र अप्रैल 2017 से छात्रों को आध्यात्मिक मैनेजमेंट गुर सीखाने की नई पहल शुरू करने जा रहा है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए विद्यालय में हनुमान की मूर्ति लगाने के साथ ही रोजाना अलग से मैनेजमेंट क्लास चलाई जाएगी।
सरस्वती शिशु मंदिर चंबा में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए हनुमान के वैज्ञानिक महत्व बताए जाने पर विचार-विमर्श किया गया।
वक्ताओं ने कहा गया कि हनुमान जी समय, वाणी, ज्ञान और संसाधनों का सटीक प्रयोग करना जानते थे, इसीलिए वह मैनेजमेंट गुरु भी कहे जाते थे। रामायण में जिस कुशलता से हनुमान जी ने तमाम समस्याओं को हल किया, वह बिना सही मैनेजमेंट के मुमकिन नहीं है।
स्कूल में मूर्ति होगी स्थापित
प्रधानाचार्य चंदन सिंह नकोटी ने कहा कि बजरंगबली ने लंका में जाकर सबसे पहले लंका की संरचना को समझा। असुरों की सभा में विभीषण जैसे सज्जन को ढूंढा।
विभीषण से मित्रता की और सीता का पता लगाया। बहुत कम समय में मां सीता को अपना परिचय दिया और संदेश लेकर वापस भगवान राम के पास लौट आए। संघर्ष, क्षमता, साहस, चतुराई की कला हनुमान जी से सीखने को मिलती है।
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज के प्रधानाचार्य इंद्रपाल सिंह परमार ने बताया कि युवाओं को कामयाबी के मंत्र सीखाने के लिए हनुमान जी की मूर्ति स्थापना की तैयारी जोरों पर चल रही है। आगामी बृहस्पतिवार को हनुमान मूर्ति स्थापित करने के लिए विद्यालय में भूमि पूजन किया जाएगा।