फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Student leave schools from schools for Family Financial stagnation

हरिद्वार में 3755 बच्चों ने सिर्फ इसलिए छोड़ दी स्कूल की पढ़ाई,रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Sun, 13 May 2018 10:13 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sun, 13 May 2018 10:13 PM IST
विज्ञापन
Student leave schools from schools for Family Financial stagnation

उत्तराखंड में यह बेहद ही चौंकानी वाली बात सामने आई है कि अकेले हरिद्वार जिले से ही तीन हजार से ज्यादा बच्चों ने हाल ही में स्कूल छोड़ दिया। परिवार की आर्थिक तंगहाली व अन्य कारणों से बच्चे स्कूल जाना छोड़ रहे हैं।

विज्ञापन


इसका खुलासा एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली फाउंडेशन की ओर से हरिद्वार जिला के 38 गांवों में चलाए गए अभियान में हुआ है। संस्था ने घर-घर कर 3755 ड्राप आउट बच्चों का चिन्हीकरण किया गया। साथ ही अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक किया। अप्रैल माह में संस्था के प्रयासों से 608 बच्चों का दोबारा से विभिन्न स्कूलों में दाखिला कराया गया।
विज्ञापन


बालिका शिक्षा के क्षेत्र में कार्य रह रही एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली फाउंडेशन ने हरिद्वार जिला में ड्राप आउट बच्चों का चयनित कर उन्हें स्कूल भेजने के लिए अभियान चलाया। इस दौरान हरिद्वार के 38 गांवों में 3755 ड्राप आउट बच्चे पाए गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

Student leave schools from schools for Family Financial stagnation

जिसमें 6 से 17 साल तक के 3280 बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया था। इसमें 2500 बालिकाएं व 780 बालक शामिल हैं। जबकि 18 से 21 आयु वर्ग के  475 ड्राप आउट बच्चे मिले। संस्था के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि ड्राप आउट बच्चों को ढूंढ कर उन्हें दोबारा से स्कूल में दाखिला कराने के लिए संस्था काम कर रही है।

हरिद्वार जिला के भगवानपुर, रुड़की, नारसन, लक्सर, बहदराबाद ब्लाक के अंतर्गत आने वाले विभिन्न स्कूलों में अप्रैल माह में 608 ड्राप आउट बच्चों का प्रवेश दिलाया गया। उन्होंने बताया कि ड्राप आउट बच्चों को दोबारा से विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर ड्राप आउट बच्चों के पास आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण उन्हें दाखिला नहीं मिल पा रहा है।

संस्था की निदेशक आंजुला त्यागी का कहना है कि ड्राप आउट बच्चों का स्कूलों में दाखिला करने से शिक्षा स्तर में सुधार नहीं आएगा। बल्कि इसके लिए शिक्षा नीति में बदलाव करने की जरूरत है। संस्था जल्द ही ड्राप आउट की समस्या का समाधान निकालने के लिए शिक्षा विभाग से मिल कर कार्य योजना तैयार करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed