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अस्पतालों की 'चाल' से कंगाल हो रहे मरीज

Thu, 26 Dec 2013 11:31 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 26 Dec 2013 11:31 AM IST
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strike in government hospital suffer patients

देहरादून में नर्स, लैब टेक्नीशियन, डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार ने मरीजों को और मुसीबत में डाल दिया है।

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सेहत सुधारने की जद्दोजहद में उनका बजट भी बिगड़ता रहा है। आंदोलन के बाद अस्पताल की व्यवस्था पटरी पर आने में वक्त लगता है लेकिन तब तक मरीज कंगाल हो चुके होते हैं।

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जांच के नाम पर कट रही जेब
इस दौरान जांचों के नाम पर उनकी जेब कट रही है लेकिन स्वास्थ्य महकमा और अस्पताल प्रबंधन आंदोलन खत्म होने के इंतजार के बहाने वैकल्पिक व्यवस्था से मुंह मोड़ रहा है।
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वेतन बढ़ोत्तरी के लिए नर्स, लैब टेक्नीशियन और डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से आम मरीजों के घर की बजट व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। इलाज में सबसे अधिक खर्च पैथोलाजिकल जांचों में आता है।

यही सुविधा दून अस्पताल, दून महिला चिकित्सालय और कोरोनेशन में मरीजों को नहीं मिल पा रही है। लैब टेक्नीशियनों के लगातार कार्य बहिष्कार के कारण ओपीडी के मरीजों की पैथोलाजिकल जांचें नहीं हो पा रही हैं।


निजी डॉक्टरों के पास पहुंच रहे मरीज
डॉक्टरों के ओपीडी कार्य बहिष्कार के कारण मरीज निजी डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। वहां सामान्य फिजिशियन का ओपीडी चार्ज सरकारी अस्पताल से कई गुना अधिक पड़ता है।

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इसी तरह नर्सों के कार्य बहिष्कार के कारण लोग अपने मरीजों को लेकर नर्सिंगहोम चले जाते हैं। इस चक्कर में मरीजों को लंबी चपत लग जाती है।

फार्मासिस्टों के हड़ताल पर रहने से लोगों को मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदनी पड़ रही थीं। डॉक्टरों और कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य महकमा और अस्पताल प्रबंधन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पा रहा है।

दून ग्रुप हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ. एलके गुसाईं का कहना है कि संविदा कर्मियों और इंटर्न से किसी तरह व्यवस्था कर ली जाती है।

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- सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की फीस 13 रुपए
- निजी अस्पतालों में परामर्श शुल्क तीन से पांच सौ रुपए

नर्सों और डॉक्टरों से बात की है। इसके साथ ही मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और वित्त विभाग से भी बात की गई है। कोशिश है कि नर्सों और डॉक्टरों की मांगें पूरी हों। अस्पतालों में कार्य बहिष्कार न हो जिससे मरीजों को दिक्कत आए।
- डॉ. जनार्दन सिंह पांगती, महानिदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण

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