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माइक्रोसॉफ्ट के CEO नडेला क्यों आते थे मसूरी?
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 06 Feb 2014 12:42 PM IST
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वर्ल्ड क्लास माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सीईओ बने हैदराबाद निवासी सत्या नडेला का मसूरी से काफी लगाव रहा है।
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मसूरी अकादमी में निदेशक रहे हैं नडेला के पिता
सत्या के पिता बीएन युगांधर 1962 बैच के आईएएस थे और वह 25 मई 1988 से 25 जनवरी 1993 तक मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी के निदेशक रहे।
जिस समय युगांधर मसूरी अकादमी में निदेशक के रूप में ज्वाइन करने आए तब सत्या नडेला की उम्र करीब 21 वर्ष थी।
हालांकि सत्या की पढ़ाई बाहर ही हुई लेकिन मसूरी में पिता की तैनाती होने के कारण उनका भी गहरा लगाव रहा।
पिता के पास लगातार आते थे मसूरी
क्योंकि वह अपने पिता के पास लगातार आते थे। सत्या नडेला के पिता रिटायर्ड आईएएस बीएन युगांधर पांच साल मसूरी प्रशासनिक अकादमी में रहे।
युगांधर इसके बाद केंद्र में प्रधानमंत्री के सचिव के रूप में भी रहे। देश की ब्यूरोक्रेसी में उन्होंने महत्वपूर्ण मुकाम बनाया था। 2004 से 2009 तक युगांधर केंद्रीय योजना आयोग के सदस्य भी रहे।
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व्यवहारिक बिन्दुओं पर केंद्रित
उत्तराखंड कैडर के 1986 बैच के आईएएस व प्रमुख सचिव कृषि डॉ. रणबीर सिंह 1988 में जब दूसरे फेज की ट्रेनिंग करने पहुंचे तो उनका वास्ता युगांधर से पड़ा।
सिंह ने बताया कि उनका व्याख्यान बेहद प्रभावशाली था। उसका अधिकतम हिस्सा पाठ्यक्रम के अलावा व्यवहारिक बिन्दुओं पर केंद्रित होता था।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव व 1991 बैच के आईएएस डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि मुझे आज भी याद है कि ओपन शर्ट पहनने का उनका स्टाइल प्रोबेशनर्स पर सिस्टमेटिक कंट्रोल करना उनके स्वभाव का हिस्सा था। युगांधर एक्सीलेंस से भी ऊपर थे।
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नक्सलवाद व ग्रामीण विकास पर पकड़
नक्सलवाद व ग्रामीण विकास पर उनकी विशेष पकड़ थी। फाउंडेशन कोर्स में उनकी ज्यादा दिलचस्पी रहती थी।
क्योंकि फाउंडेशन में आईएएस, आईपीएस व आईएफएस तीनों सेवाओं के अफसर संयुक्त रूप से ट्रेनिंग लेते थे। अकादमी में युगांधर की मौजूदगी का अहसास बराबर रहता था।