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यहां चोरी की बिजली से रोशन हो रही तीन पुलिस चौकियां

Fri, 03 Feb 2017 10:41 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 03 Feb 2017 10:41 AM IST
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Stolen electricity used in police chowkies at haridwar
- फोटो : Demo Pic

हरिद्वार में आम लोग ही बिजली चोरी नहीं कर रहे हैं, बल्कि चोरी करने वालों को पकड़ने वाली पुलिस भी बिजली चोरी कर रही है।

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इसे पुलिस की दबंगई कहें या ऊर्जा निगम की लापरवाही, शहर की तीन पुलिस चौकियों और पुलिस के दर्जनों आवासों में कई सालों से अवैध रूप से बिजली जलाई जा रही है। इन दिनों ऊर्जा निगम अभियान चलाकर बकायादारों और बिजली चोरों पर नकेल कस रहा है, लेकिन पुलिस पर अभियान की आंच तक नहीं है।
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ऊर्जा निगम के लाख जतन के बीच शहर में बिजली चोरी का सिलसिला जारी है। बिजली चोरी रोकने के लिए पहले इलेक्ट्रॉनिक मीटर और फिर घनी आबादी वाले इलाकों में इन्सयोलेटेड वायर डाली गई है।
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इसके बावजूद गली मौहल्लों और बस्तियों के अलावा बाजारों और बड़ी कॉलोनियों तक में बिजली चोरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

चुप्पी साधे हुए है ऊर्जा निगम 

Stolen electricity used in police chowkies at haridwar
बिजली का बिल

ध्यान देने वाली बात यह है इन सभी जगहों पर चोरी छिपे बिजली चोरी की जाती है। जो अभियान के दौरान ऊर्जा निगम और विजिलेंस की पकड़ में आ जाती है। लेकिन पुलिस खुलेआम बिजली चोरी करती है, इसके बावजूद ऊर्जा निगम चुप्पी साधे हुए है।

शहर में हरकी पैड़ी पुलिस चौकी, खडख़ड़ी पुलिस चौकी, सप्तऋषि पुलिस चौकी के अलावा काशीपुरा व खडख़ड़ी में बने पुलिस आवासों में कई दशकों से चोरी की बिजली चल रही है।
     
इनके अलावा ज्वालापुर सहित अन्य थानाक्षेत्रों में भी कई पुलिस चौकी व पुलिस आवास चोरी की बिजली से रोशन हो रहे हैं। जिनसे अभी तक ऊर्जा निगम को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग चुका है और लगातार लग रहा है।

किसी आम व्यक्ति के घर में एक बल्ब की बिजली चोरी पकड़े जाने पर ऊर्जा निगम दौड़कर मुकदमा दर्ज कराता है, मगर पुलिस पर कार्रवाई तो दूर अवैध बिजली जलाने के लिए खुद ऊर्जा निगम के कर्मचारी ही खंबे पर वायर जोड़ते हैं। इससे पुलिस और ऊर्जा निगम दोनों विभागों पर सवाल खड़े होते हैं।      

सरकार दे रही पैसा, फिर भी नहीं तैयार

Stolen electricity used in police chowkies at haridwar
money shimla

सभी सरकारी विभागों में बिजली पानी सहित सभी तरह के मेंटीनेंस का पूरा खर्च सरकार की ओर से दिया जाता है। जिन कोतवालियों, पुलिस चौकियों और आवासों में विधिवत रूप से कनेक्शन लेकर बिजली जलाई जा रही है, उनके बिल के लिए भी बजट मिलता है।

जब पुलिस को बिजली का बिल अपनी जेब से नहीं भरना है तो फिर कनेक्शन लेने की जहमत क्यों नहीं उठाई जा रही है। वहीं कानून सबके लिए बराबर है तो ऊर्जा निगम पुलिस पर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा है।       
   
चार लोगों की हो चुकी है मौत      
चोरी की बिजली जलाने के लिए हरकी पैड़ी पर वायर का जाल बिछा हुआ है। जिनसे कई बार हादसे हो चुके हैं। पिछले दिनों हरकी पैड़ी पर चार यात्रियों की करंट से झुलस कर मौत हो गई थी। पूरे मामले की गाज सिर्फ नगर निगम पर गिरी।

जबकि पुलिस और ऊर्जा निगम की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई। बताया जाता है कि पैड़ी क्षेत्र में चोरी की बिजली के लिए अवैध कनेक्शन बांटे गए हैं। बिजली चोरी के इस खेल में ऊर्जा निगम सहित कई अन्य विभागों के कर्मचारियों की भूमिका भी पाक साफ नहीं है।      
    
बिजली चोरी के मामलों में लगतार कार्रवाई की जा रही है। शहर की कई पुलिस चौकियों और पुलिस आवासों में विद्युत संयोजन के बिना बिजली जलने का मामला संज्ञान में है। शहर की कानून व्यवस्था से जुड़ा विभाग होने के चलते सप्लाई नहीं काटी जाती। लेकिन कनेक्शन लेने के लिए एसएसपी को पत्र भेजा जा चुका है।
- वीएस पंवार, अधिशासी अभियंता ऊर्जा निगम (नगरीय) हरिद्वार

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