धरती से पहले आसमान में हर दिन मन रही दिवाली, 21 अक्टूबर को दिखेगा आतिशबाजी का शानदार नजारा
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देश में दिवाली की धूम शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन आकाश में इन दिनों हर रात प्रकृति दिवाली मना रही है। ओरियोनिड उल्कापात से आकाश में चमकीली रोशनी बिखर रही है।
हालांकि अभी चांद के पूर्णिमा वाले दौर के कारण ये नजर नहीं आ रही है, लेकिन 21 तारीख की रात जब यह उल्कापात अपने चरम पर पहुंचेगा और चांद मद्धम पड़ चुका होगा तब आतिशबाजी का यह शानदार नजारा आसानी से नजर आएगा।
यह आतिशबाजी इतनी रोमांचक होगी कि नासा ने इसे 2019 की सर्वाधिक आकर्षक आकाशीय घटना घोषित किया है। यह उल्कापात हेली धूमकेतु द्वारा छोड़े गए छोटे-छोटे कणों के कारण होता है। इन दिनों ये कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रहे हैं और घर्षण के कारण जल जाने से उल्कापात का नजारा प्रस्तुत करते हैं।
ओरियोनिड 21 अक्टूबर की रात पूर्व दिशा में नजर आएगा
ये उल्कापात आकाश में ओरियन कांस्टिलेशन की दिशा से आता प्रतीत होता है, जिस कारण इसका नाम ओरियोनिड मीटियर शॉवर पड़ा है। ओरियोनिड 21 अक्टूबर की रात पूर्व दिशा में नजर आएगा, जबकि हल्की चमक के साथ चंद्रमा दक्षिण में होगा, ऐसे में यह उल्कापात आतिशी नजारा प्रस्तुत करेगा। 21 की देर रात एवं 22 की सुबह लगभग 25 उल्कापात प्रति घंटे की दर से होगा।
इस उल्कापात की विशेषता यह है कि इसमें उल्काएं बहुत तेज गति से वायुमंडल में प्रवेश करती हैं जो 66 किमी प्रति सेकेंड तक होती है। इस कारण घर्षण से जलने के बाद इनके पीछे धुएं की एक रेखा नजर आती है जो इसे और भी आकर्षक बना देती है।
आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज के पूर्व निदेशक डॉ. अनिल पांडे के अनुसार तीव्र गति के कारण ये उल्कापात पलक झपकने तक के अंतराल में ही आंखों से ओझल हो जाता है।